सुंदरता देखने वाले की आंखों में होती है जैसे कि एक कहावत है। लेकिन सुंदरता की व्याख्या दिन पर दिन बदलती जा रही है। पहले जो कभी दिल और मन देखा करते थे, वो आज सुंदरता में फिगर और न जाने क्या क्या ढूंढते हैं..ऐसे में आपको उस हसीन रानी की कहानी बतानी जरूरी है। जिसकी खूबसूरती पर इतने लोग फिदा हुए कि, उसे अपना बनाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो गए।आखिर में जब हसीन मल्लिका नहीं मिली तो उनमें से 13 पुरुषों ने तो आत्महत्या कर ली थी।जानिए कौन थी वो रानी और किससे हुई शादी?
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कजर की ये राजकुमारी सुंदरता की देवी मानी जाती थी। हालांकि वह बिल्कुल भी आकर्षक नहीं थी, राजकुमारी का परिवार अमीर था और वह गोरी थी। उसके परिवार की संपत्ति बहुत अधिक थी, लेकिन इसके अलावा, राजकुमारी इराक में उस समय की सबसे शिक्षित महिलाओं में से एक थी।
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तेहरान में 1883 में जन्मी कजर की राजकुमारी बड़ी होकर अपने जीवन में एक ऐसा समय बिताएगी जब 145 पुरुष विवाह के लिए उसका हाथ मांगेंगे, शायद राजकुमारी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। हालांकि, कुछ पुरुषों ने इसे व्यक्तिगत रूप से लिया और राजकुमारी के इंकार के बाद 13 पुरुषों ने आत्महत्या कर ली थी।
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अंत में, राजकुमारी ने अपने प्रेमी से शादी की, 2 बेटे और 2 बेटियां भी हुईं और तलाक भी हो गया।पति फारसी राजा नासिर अल-दीन शाह काजर थे। उन्होंने 47 वर्षों तक ईरान पर शासन किया और काजर की 84 पत्नियों थीं।जिनमें से सबसे प्रिय पत्नी राजकुमारी जहरा थीं।
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अपने समय में पूर्णता और सुंदरता का प्रतीक मानी जाने वाली फ़ारसी राजकुमारी का पूरा नाम जहरा ख़ानम तदज एस-सल्टानेह था और वह क़ाज़र राजवंश के दौरान राजकुमारी थीं। पति राजा शाह नासर अल-दीन शाह काजर, 1948 में एक शक्तिशाली पुरुष थे, जो उस समय के चौथे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति थे। काजर का राज्य ईरान के इतिहास में सबसे लंबा था।
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जब एक विदेशी व्यापारी ने नासिर से पूछा कि ज्यादा वजन की महिलाओं को सुंदर क्यों माना जाता है, तो राजा ने जवाब में कहा थी कि, "जब आप कसाई के पास जाते हैं, तो क्या आप हड्डियां खरीदतें हैं या मांस खरीदते हैं?" मुझे यकीन है कि आप इससे सहमत होंगे।
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लेकिन एक व्यक्ति कि बाहरी सुंदरता से अधिक भी बहुत कुछ होता है। जहरा को कलाओं का शौक था और वह एक चित्रकार और लेखिका थीं। जहरा महिलाओं के अधिकारों के लिए भी लड़ीं थी और भविष्य की पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त कर रही थीं।
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उनका एक साहसिक कदमों में से एक था जब उन्होंने अदालत में रहते हुए अपने हिजाब के बजाय पश्चिमी कपड़े पहनने का फैसला किया। वह उन प्रमुख महिलाओं में से एक थीं जिन्होंने ईरान की महिलाओं के अधिकार के लिए समूह बनाया जिसका नाम सोसाइटी ऑफ वूमेन फ्रीडम था।
जहरा अपनी आखिरी सांस तक महिलाओं के समान अधिकारों के लिए लड़ती रहीं। 1936 में उनका निधन हो गया और उन्हें आज भी नारीवादी आंदोलन के अग्रदूतों के रूप में देखा जाता है।जबकि कई लोग सोच सकते हैं कि वह बाहरी सुंदरता की वर्तमान परिभाषा को पूरा नहीं कर सकती, लेकिन कई अन्य तरीकों से काफी सुंदर महिला थीं।