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आखिर बुद्धिमान बड़े बालों में ही क्यों दिखते हैं? बड़ा रोचक है इसके पीछे का किस्सा

Sun, 22 Jul 2018 04:03 PM IST
सुबोध कुमार मिश्रा
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आइंस्टीन को देखा आपने! लियोनार्दो की तस्वीर भी देखी होगी! न्यूटन, गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर से लेकर महान वैज्ञानिक कलाम तक, सबको आपने देखा है, तो बड़े बालों में ही देखा है। आखिर बुद्धिमान बड़े बालों में ही क्यों दिखते हैं?

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बड़ी पुरानी कहानी है, आपने भी सुनी होगी। इजराइल में कभी सैमसन नाम का एक व्यक्ति था। बलशाली और बुद्धिमान। धार्मिक कथाओं के अनुसार, सैमसन एक ‘नाजिराइट’ था। ‘नाजिराइट’ का अर्थ होता है, एक ऐसा व्यक्ति जो शराब और अंगुर से बनी किसी भी चीज का सेवन न करता हो। जो कभी भी अपने सिर के बाल न कटाता हो और कभी किसी शवयात्रा में शामिल न होता हो। कहते हैं, सैमसन की सारी ताकत उसके बालों में थी।

लेकिन वह अपने दुश्मन खेमे की डेलीलाह नामक एक युवती से प्रेम कर बैठा। दुश्मनों ने डेलीलाह को लालच देकर सैमसन की शक्ति का राज पता लगाने को कहा। जब डेलीलाह उसकी शक्ति का राज जान गई, तो उसने सो रहे सैमसन के सारे बाल कटवा दिए। इससे वह शक्तिहीन हो गया। दुश्मनों ने उसे पकड़ लिया। आंखें फोड़ दीं। उसे जेल में डाल दिया गया। जेल में रहने के दौरान उसके बाल फिर से आने लगे। उसकी शक्ति भी वापस आने लगी थी और एक दिन जब मंदिर में एक उत्सव के दौरान जंजीर में बंधे सैमसन का सब मजाक उड़ा रहे थे, तो फिर से शक्तिशाली हो चुके सैमसन ने अचानक मंदिर के पिलरों को उखाड़ दिया, जिससे मंदिर पूरी तरह ध्वस्त हो गया।  

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यह कहानी धार्मिक विश्वास पर आधारित है। इसकी वैज्ञानिक व्याख्या तो नहीं हो सकती, लेकिन एक सवाल तो उठता ही है कि क्या बालों का ताकत और बुद्धि से सचमुच कोई रिश्ता है? पीछे जाएं, तो आपको दर्जनों ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे, जहां हमें बड़े बालों वाले बुद्धिमान दिखते हैं। महान वैज्ञानिक न्यूटन हों या आइंस्टीन। नाटककार शेक्सपीयर हों या दार्शनिक रजनीश। चित्रकार लियोनार्दो द विंसी हों या कवि जॉन मिल्टन। विश्व प्रसिद्ध कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर हों या सुमित्रानंदन पंत। महान वैज्ञानिक व पूर्व राष्ट्रपति कलाम हों या मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन। गौर करेंगे तो पाएंगे कि अपने देश में भी बड़े बालों में बुद्धिमानों की संख्या कम नहीं।

 इस बात में कोई शक नहीं कि बाल सिर्फ सौंदर्य का ही प्रतीक नहीं है, यह और भी बहुत कुछ कहता है। यह किसी न किसी रूप में व्यक्ति की प्रकृति, सोच, बुद्धि और यहां तक की बल को भी प्रभावित करते हैं। शरीर में बालों के निर्माण की प्रक्रिया तो एक ही है, लेकिन इसकी विशेषताएं भौगोलिक और पर्यावरणीय स्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं। बालों से कई तरह की कहानियां भी जुड़ी हैं। प्राचीन ग्रीस में लंबे बालों को संपन्नता और शक्ति का प्रतीक माना जाता था। वैज्ञानिक भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि लंबे बाल उत्पादकता और यौवन की निशानी है। बालों के विशेषज्ञ डॉक्टर सचिन अग्रवाल कहते हैं, “सिर के बाल जब अपनी पूर्ण और परिपक्व लंबाई के होते हैं, तो वह प्राकृतिक रूप से फॉस्फोरस, कैल्शियम और विटामिन डी प्राप्त करते हैं, जो अंततः मस्तिष्क के शीर्ष पर दो नलिकाओं के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं। यह आयनिक परिवर्तन स्मृति को और अधिक कुशल बनाता है और इससे शारीरिक ऊर्जा, बेहतर सहनशक्ति और धैर्य की प्राप्ति होती है।” 

कुछ जानकार तो यहां तक कहते हैं कि यदि आप अपने बालों को काटते हैं, तो आप न केवल इस अतिरिक्त ऊर्जा और पोषण को खो देते हैं, बल्कि आपके बालों को पुनः विकसित करने के लिए बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण ऊर्जा और पोषक तत्वों को खर्च करना पड़ता है। बालों को शरीर के एंटीना की संज्ञा दी गई है। ये सूर्य की ऊर्जा को इकट्ठा कर मस्तिष्क में पहुंचाते हैं। 

प्राचीन भारत में ऋषि-मुनियों की बुद्धिमत्ता से हम सब परिचित हैं। ऋषि-मुनियों के बाल काफी लंबे होते थे और वे अपने बालों में गांठ लगाकर रखते थे। सिर के ऊपर बालों की यह गांठ ललाट के चुंबकीय क्षेत्र को सक्रिय कर मस्तिष्क के केंद्र में पाइनल ग्रंथि को उत्तेजित करता है। पाइनल ग्रंथि की इस सक्रियता के परिणामस्वरूप एक स्राव होता है, जो उच्च बौद्धिक कार्यकलाप के विकास के लिए केंद्रित है। बाल शरीर की विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा का एक कंडक्टर है। सिर के शीर्ष के बाल शरीर में ऊर्जा का संचालन करते हैं। प्राचीन काल में, ऋषि वह व्यक्ति होता था, जिसमें शरीर की ऊर्जा और प्राण के प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता थी। एक "महर्षि" वह व्यक्ति था, जो शरीर में ध्यान से और इच्छानुसार ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित कर सकता था।

ऐसा माना जाता है कि आपके बालों की युक्तियां एंटीना की तरह हैं, जो ब्रह्मांड से ऊर्जा इकट्ठा करते हैं, ताकि चेतना और रचनात्मकता के उच्च स्तर को प्रोत्साहित किया जा सके। बाल तंत्रिका तंत्र का एक प्राकृतिक विस्तार है और मस्तिष्क को महत्वपूर्ण जानकारी संचारित करने के लिए प्रेरित करते हैं। बाल आपके शरीर के पूरे विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र को संतुलित करते हैं, जिससे आपको अपनी जीवन शक्ति और अंतर्ज्ञान बढ़ाने में मदद मिलती है। 

भारतीय योग एवं प्रबंधन संस्थान के कुमार राधारमण कहते हैं, “योग के परिप्रेक्ष्य में, बाल प्रकृति का एक अद्भुत उपहार है, जो वास्तव में कुंडलिनी ऊर्जा (रचनात्मक जीवन शक्ति) को बढ़ाने में मदद करता है, जो जीवन शक्ति, अंतर्ज्ञान और शांति को बढ़ाता है। यह वैज्ञानिक रूप से भी साबित हुआ है कि जिन लोगों के लंबे बाल होते हैं वे कम थके हुए होते हैं और उनके निराश होने की संभावना कम होती है।”
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प्राचीन समय में जिसे तिरस््कृत, लज्जित, अपमानित करना होता था, उस अपराधी का सिर मुड़ाकर घुमाया जाता था। सिर मुड़ा देने से अध्यात्म शास्त्र के अनुसार, “मन गिर जाता है, जोश ठंडा हो जाता है, नाड़ी तंतु शिथिल हो जाते हैं। ऐसा होने से अपराधी का उत्साह ठंडा होकर मन गिर जाता है, जिससे भविष्य में वैसा करने को उसका जी नहीं करता।” 
अध्यात्म के जानकार स्वामी अवशेषानंद कहते हैं, “प्रायश्चित में भी सिर मुंड़ाने का विधान है। किसी स्वजन की मृत्यु हो जाने पर मुंडन कराया जाता है। इसका अर्थ मन को शिथिल करके शोक मनाना है। साथ ही हम मृतक से मोह खत्म करने के लिए अपने सौंदर्य और प्रिय वस्तु बालों को उसे दे रहे हैं।'' 

मस्तिष्क विद्या में आचार्यों का कथन है कि शिखा स्थान मस्तिष्क की नाभि है। दूसरे शब्दों में इसे मस्तिष्क का हृदय भी कह सकते हैं। इस केन्द्र स्थान से संबंधित चार दिशाओं में पांच शक्तियां रहती हैं विवेक शक्ति, दृढ़ता शक्ति, दूरदर्शिता शक्ति, प्रेम शक्ति और संयम शक्ति। इन पांचों की जड़ शिखा मूल में है। मस्तिष्क का हृदय होने तथा पांच महत्वपूर्ण शक्तियों का केन्द्र होने के कारण इस स्थान का महत्व शरीर के सब स्थानों से अधिक है। इस स्थान को स्वस्थ एवं सुरक्षित रखने का सर्वोत्तम तरीका ‘केशाच्छादित’ रखना है। 

बालों में बाहरी प्रभाव को रोकने की शक्ति है। शिखा स्थान पर बाल रहने से बाहरी अनावश्यक सर्दी, गर्मी का प्रभाव नहीं होता और उसकी सुरक्षा सदा बनी रहती है। इससे उस मर्म स्थान में कोई विकार उत्पन्न नहीं हो पाता। यही कारण है कि गुरुकुल परंपरा में शिष्यों की बड़ी-बड़ी शिखाएं होती थीं। देवताओं के चित्र देखने से भी बालों की महत्ता पता चलती है। 

मनोदशा पर डालता है असर
शरीर के लिए बाल काफी महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन, बालों का शरीर की शक्ति या बुद्धिमता से किसी तरह का संबंध होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण अभी सामने नहीं आया है। हां, इतना जरूर है कि बाल व्यक्ति की सुंदरता, व्यक्तित्व और यहां तक कि उसके आत्मविश्वास को भी काफी हद तक प्रभावित करते हैंै। युवाओं में सुंदर दिखने का क्रेज ज्यादा होता है और बाल सुंदरता बढ़ाने में सहायक होते हैं। ऐसे में जिन युवाओं के सिर पर बाल नहीं होते, उनकी मनोदशा में एक प्रकार की हीन भावना घर कर जाती है, जो अंततः उनके आत्मविश्वास को कमजोर बनाती है। बालों के निर्माण में प्रोटीन का अहम रोल होता है। ऐसे में घने व लंबे बालों से पता चलता है कि व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ है। जहां तक साधु-संतों द्वारा लंबे बाल रखने की परंपरा की बात है, तो अक्सर वे लोग पहाड़ों पर जाकर तपस्या आदि क्रिया-कर्म करते थे। चूंकि पृथ्वी एक विशाल चुंबक की भांति कार्य करती है और पहाड़ों पर चुंबकीय प्रभाव ज्यादा रहता है। ऐसे में पहाड़ों पर मिलने वाला पानी मैग्नेटाइज्ड होता है। उस पानी के प्रयोग के कारण उनके बाल लंबे, घने और मजबूत होते थे और शरीर भी स्वस्थ रहता था।  
- डॉ. अरविंद पोसवाल, हेयर एक्सपर्ट  
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