भैसों की नीलामी से कोई 13 लाख 78 हज़ार के क़रीब रक़म जमा की गई है। इससे पहले बुलेटप्रूफ़ कारों की नीलामी में 4 करोड़ 35 लाख की कमाई हुई थी। नवाज़ शरीफ़ के समर्थकों में इन भैंसों के प्रति ख़ासा प्यार है। हसन लतिफ़ नाम के ख़रीदार के पास पहले से ही एक पूरा डेरी फ़ार्म है लेकिन वो इन भैंसों को ख़रीदने का मौक़ा नहीं खोना चाहते थे। उन्होंने बताया, "मेरे पास सौ से ज़्यादा भैंसें हैं। लेकिन मैं अपने नेता की एक भैंस ख़रीदना चाहता था। ये मेरे इज़्ज़त की बात है और अगर मौका मिला तो मैं इसे दोबारा शरीफ़ साहब को लौटा दूंगा।"
प्रधानमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी ने बताया, "नीलामी में हमारी उम्मीद से ज़्यादा कमाई हुई। हम इसकी क़ामयाबी से ख़ुश हैं।" लेकिन सभी इस नीलामी से ख़ुश नज़र नहीं आए।रावलपिंडी से आए एक ग्राहक ने कहा, "ऐसी भैंसे बाज़ार में इससे आधी क़ीमत पर मिल रही हैं। इनकी क़ीमत बहुत ज़्यादा है। मुझे तो कुछ ग्राहक भी असली नहीं लग रहे हैं।" लेकिन ऊंची क़ीमत सरकार के लिए अच्छी ख़बर है क्योंकि वो गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। हालांकि ये नीलामी उस समस्या से लड़ने के लिए ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है।