कोच्चि में रहने वाली 26 साल की जया पीएस कला में स्नाकोत्तर हैं। जया जब भी स्टूडियो से बाहर निकलती हैं, अपने शरीर को कोलिरीयम नाम के एक पेंट से रंगती हैं। यह पेंट एक तरह का आईशैडो है। उन्होंने बीबीसी को बताया, "रोहित वेमुला की मौत के बाद मैंने निश्चय कर लिया कि सार्वजनिक जगहों पर जब भी जाऊंगी शरीर को काले रंग में रंग कर ही जाऊंगी।"
रोहित वेमुला हैदराबाद विश्वविदियालय से पीएचडी कर रहे थे। उन्होंने 17 जनवरी 2016 को कैंपस के भीतर कथित भेदभाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। जया कहती हैं, "यह खबर मेरे लिए दर्दनाक थी। मैंने देश के दूसरे वेमुलाओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए ऐसा करने के बारे में सोचा।"
उनकी बहन शरीर पर रंग लगाने में उनकी रोज मदद करती हैं। इस काम में पूरे दो घंटे लग जाते हैं। जया बताती हैं कि रोहित उन्हीं की उम्र के थे, इसलिए उनके मन में सवाल उठा, "जो सुविधाएं मुझे मिल रही हैं वो उन्हें क्यों नहीं मिला।"
काले रंग वालों को देख डरते हैं लोग
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खुद ही जवाब देते हुए वे कहती हैं, "ऐसा इसलिए क्योंकि हमारी जाति व्यवस्था में काले रंग को बहुत हिकारत से देखा जाता है। उन्होंने बताया, "जाति को रंग के साथ जोड़ कर देखा जाता है। जो कुछ भी काला है उसे समाज में स्वीकार नहीं किया जाता। ख़ुद को काले रंग में रंग देने के बाद मैंने इस भेदभाव को महसूस किया।"
इस दौरान उन्हें कई तरह के अनुभव मिले। जया बताती हैं, "एक बार मैं बस में जा रही थी। एक महिला मुझे देखकर चिल्ला पड़ी। उसने मुझे पूतना कहा।" केरल भारत का सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य है। लेकिन यहां भी रंग मायने रखता है। काफी लोग काले रंग की लड़की से शादी नहीं करना चाहते हैं।
जया ने शपथ ली है कि वे विरोध में 125 दिनों तक 'काला' रंग लगाएंगी। विरोध के आखिरी दिन यानि 26 मई को वे शहर में एक 'बड़ा कार्यक्रम' आयोजित करना चाहती हैं, जिसमें दलित लेखक, कलाकार और कार्यकर्ता भाग लें।
वे इस कार्यक्रम में 'गोरे रंग को पूजने वाले समाज में काली लड़की की ज़िंदगी' किताब का विमोचन भी करेंगी।
लोगों की धारणा तोड़ना चाहती हैं जया
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8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जया एक भीड़भाड़ वाली सड़क पर खड़ी हुईं। उन्होंने सड़क पर रात में महिलाओं की हालत बताने के लिए एलईडी लाइट्स लगाई थी। जया कहती हैं कि भले इससे समाज की पारंपरिक धारणाएं टूट जाएं, लेकिन वे अपना संदेश दूसरों तक पहुंचाने के लिए ताकतवर तरीकों का इस्तेमाल करना चाहती थीं।
वे कहती हैं, "जब मैं चल रही होती हूं तब लोगों को मैं काले रंग की दिखती हूं, लेकिन जब मैं उनके पास पहुंचती हूं तब लोग सवाल करते हैं। मैं उन्हें ऐसा करने के पीछे की राजनीति समझाती हूं। कुछ सकारात्मक होते हैं जबकि कुछ मुझ पर हंसते हैं।"
कई कलाकारों और मीडिया ने इस विरोध में जया का समर्थन किया है। गैर लाभकारी संस्था कोच्चि बिएन्नेल फाउंडेशन के अध्यक्ष बोस कृष्णमचारी कहते हैं, "विरोध करने के तरीकों के हिसाब से यह सबसे अलग तरीका है।"
वे कहते हैं, "समय आ गया है कि कलाकार समाज को संवेदनशील बनाने के लिए काम करें. समाज में महिला, जाति और रंग के नाम पर भेदभाव होता है।"