ठंड ऐसी कि ऊंचाई से गिरता झरना भी जम जाए और जांबाज ऐसे कि उस जमे पानी पर कदम टिका-टिकाकर चढ़ने में पल भर को भी नहीं हिचके। हिमाचल प्रदेश की स्पिति घाटी में अभिजीत सिंह और प्रणव रावत ने एक ऐसा रिस्क लिया जिसके बारे में इसके पहले भारत के किसी पर्वतारोही ने सोचा भी नहीं था।
मगर नाम बनते हैं रिस्क से औरमाउंटेन ड्यू उन दो अनूठे पर्वतारोहियों की ऐसी ही कहानी लेकर आया है।
16 जनवरी को टेंपरेचर माइनस से इतना नीचे पहुंच चुका था कि 200 फीट से ज्यादा ऊंचा वाटरफॉल पूरा का पूरा जम गया। 200 फीट ऊंचाई यानी करीब 20 मंजिल की इमारत। अब इस पर चढ़ने का मतलब यह था कि एक भी गलत कदम उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता था।
अभिजीत सिंह और प्रणव रावत ने किया कारनामा
अभिजीत सिंह, एडवेंचर फोटोग्राफर, माउंटेनियर
- फोटो : Mountain Dew
दोनों को यह हकीकत पता थी कि भारत में इससे पहले किसी ने जमे हुए वाटरफॉल पर चढ़ने का दुस्साहस नहीं किया। वजह? सभी मानते थे कि यह खतरनाक था। मगर मार्केटिंग की नौकरी से इस्तीफा देकर फुलटाइम फोटोग्राफर बन चुके अभिजीत ने तय किया कि वे न सिर्फ चढ़ेंगे बल्कि इस पूरे ऐडवेंचर को कैमरे में भी कैद करेंगे।
उनके इस सपने को पूरा करने में साथ दिया प्रणव रावत ने। प्रणव का भी अभिजीत की तरह कुछ अलग करने का सपना था। वे कुछ ऐसा करना चाहते थे जो इससे पहले किसी न किया हो।
यह इतना आसान नहीं था। शुरू के कई महीने कड़ी मेहनत और तैयारियों में लगे। कई घंटे की फिजिकल एक्सरसाइज के अलावा मन को भी मजबूत करना था। एकाग्रता बढ़ानी थी। यहां पर एक भी गलत कदम का मतलब था कोई दूसरा चांस नहीं। जमा हुआ पानी कभी भी कांच की तरह चटख सकता था।
“नाम बनते हैं रिस्क से!”
भारत के इन जांबाज पर्वतारोहियों की कहानी से सीख लेने की जरूरत
- फोटो : Mountain Dew
आखिरकार एक छोटी सी टीम तैयार हुई। जरूरी उपकरण और कैमरे जुटाए गए। प्रणव और अभीजीत को न सिर्फ उस दुर्गम चढ़ाई करनी थी बल्कि उस फिल्म को भी अंजाम देना था, जो ‘द फॉल’ के नाम से तैयार हुई। प्रवण कहते हैं, “यह एक नई शुरुआत है और नया काम करने के लिए रिस्क तो उठाना ही पड़ता है।“
जब उन्होंने इसे करने की ठानी तो यह नामुमकिन लगता था लेकिन आज इस कामयाबी को हासिल करने के बाद अभिजीत और प्रणव की जिंदगी बदल चुकी है।
आज वे भारत के सबसे जांबाज पर्वतारोहियों में गिने जाते हैं। सांस रोक देने वाले वह अभियान कैमरे में कैद हो चुका है। देखें उस साहस भरे अभियान को जिसे माउंटेन ड्यू लेकर आया है हमारे बीच और कहें कि “नाम बनते हैं रिस्क से!”