ब्राजील में परिवार वालों ने एक महिला को गलती से मृत समझकर दफन कर दिया। महिला 11 दिन तक कब्र से निकलने के लिए तड़पती रही। आसपास के लोगों ने कब्र से आवाज सुनकर परिवार वालों को बताया। कब्र खोदी गई, लेकिन तब तक महिला मर चुकी थी। पर ताबूत में हर ओर कब्र में महिला के जिंदा होने के निशान थे। उसके सिर और हाथों पर चोट के निशान मिले हैं और ताबूत में खून लगा था। उसने ताबूत तोड़ने की खूब कोशिश की थी। ताबूत की कील ढीली पड़ गई थी।
स्थानीय निवासी एना फ्रांसिस्को ने बताया, रिसाचो दा नेवेस में रहने वाली 37 साल की रोजांगेला अल्मेंडा दा सांतो के परिवार वालों ने समझा की सेप्सिस के संक्रमण से उसकी मृत्यु हो गई। 28 जनवरी को रोजांगेला को लकड़ी के ताबूत में बंद कर सीमेंट की कब्र में दफन कर दिया गया। नौ फरवरी को कब्र के पास में खेल रहे बच्चों ने उसमें से आवाज आते सुनीं। बच्चों ने वहां रहने वाली नतालिना सेल्वा को बताया। नतालिना के मुताबिक पहले तो उन्हें लगा कि बच्चे मजाक कर रहे हैं। जब वह कब्र के पास गईं, तो उन्होंने दो बार हांफने की आवाज सुनी। फिर यह आवाज बंद हो गई। इसके बाद उन्होंने रोजांगेला के परिवार वालों को उसके कब्र में जिंदा होने की सूचना दी। कब्र खोदी गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
रिसाचो दा नेवेस के पुलिस प्रमुख अर्नाल्डो मोंटे ने बताया, स्थानीय लोगों का कहना है कि कब्र तोड़े जाने के बाद उत्सुकता वश वहां भीड़ जमा हो गई थी। 500 लोगों ने मृत महिला के हाथ-पैर छुए थे। उनका कहना है कि हाथ-पैर गर्म थे। यानी वह कुछ समय पहले तक वह जिंदा थी। पुलिस अब परिवार वालों के बयान दर्ज कर रही है। मृत महिला के शव की जांच की जाएगी। ताकी पता चल सके कि आखिरी हुआ क्या है।