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200 सालों के बाद भी जिंदा है ये शख्स! ममी या कुछ और? देखें

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आप क्या विश्वास कर सकते हैं कि कोई शख्स दो सालों तक ही मुद्रा में चुपचाप बैठे रहे और उसी मृत्यु भी ना हों?
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मिरर में छपी एक खबर के मुताबिक हाल ही में मंगोलिया के उलन बेटर नाम के सबसे बड़े शहर में मेडिटेशन की मुद्रा में बैठा एक 200 साल पुराना व्यक्ति मिला है।

वो किसी ममी जैसा हो गया है। एकदम जड़। ये अभी तक साबित नहीं हो सका है कि वो जिंदा है या मर चुका है। खुद वैज्ञानिकों के लिए बड़ी पहेली बना चुका ये शख्स असल में एक तिब्बती मॉन्क है जो गहरे ध्यान की मुद्रा में लीन दिखाई दे रहा है।
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बौद्घ एक्सपर्ट की है अलग राय

पैर के ऊपर पैर को क्रॉस किए मिले इस मॉन्क को जब देखा गया तब पाया गया कि उसने अपने अस्तित्व को लेकर वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल रखा है।

इस ममी को अध्ययन के लिए उलन के ‌ही फॉरेंसिक एक्सपर्ट सेंटर में भेज दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ मंगोलियन इंस्ट्टियूट ऑफ बुद्धस्टि आर्ट के फाउंडर गैंगोविन पुरेबात का कहना है कि जिस तरह से ये लामा बैठा है उसे घ्यान की मुद्रा में है।

वो मुद्रा बताती है कि लामा जिंदा है। वो कहते हैं कि लामा तुकदाम की मुद्रा में है। ये वो पोजिशन होती है जब कोई गहरे ध्यान या मुद्रा में चले जाता है।
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आ चुकें है पहले ऐसे और भी मामले

आपको बता दें कि डीप मेडिटेशन कहे जाने वाला ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी भारत में कई बाबाओं को ऐसा कहा जाता है कि वो मरे नहीं हैं और जड़ होने के बाद भी जिंदा हैं।

एक ऐसा ही मामला रूस में भी आ चुका है जहां साल 2002 में एक ऐसे बाबा खोजे गए थे जिनका बदन थोड़ा बहुत सड़ रहा था। मॉन्क कहते थे कि वो पूरी तरह से मरे हुए नहीं हैं।

सालों पुराने इन बाबा को जब मॉनेस्ट्री के आस-पास लेकर जाया जाता था, तो उनके बॉडी के तापमान में हलचल देखी जाती थी। कहा जाता था कि वो 1927 में मर चुके थे।

वो ध्यान में जाने से पहले अपनी साथी मॉन्क को कहकर गए थे कि उन्हें कमल के पोजिशन में ही रहने दिया जाए। उनका बदन पर नमक लगा हुआ था जब वो खोजे गए थे।
 
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