किसी सड़क, चौराहे या बाजार में अगर कोई जरूरतमंद मदद के लिए हाथ बढ़ा दे तो अक्सर लोग अपनी हैसियत के मुताबिक उसकी मदद कर देते हैं। कई बार बच्चों और बुजुर्गों को देखकर लोगों का दिल और भी पसीज जाता है। लेकिन क्या हर बार जो नजर आ रहा है, वही सच होता है? बरेली से सामने आए एक वायरल वीडियो ने इसी सवाल को खड़ा कर दिया है। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी वीडियो के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को ऋतु जायसवाल ने अपनी बालकनी से रिकॉर्ड किया है। वीडियो में वह नीचे पार्किंग के पास मौजूद कुछ महिलाओं और बच्चों को कैमरे में जूम करके दिखाती नजर आती हैं। ऋतु का दावा है कि वहां बच्चों को घायल दिखाने की तैयारी की जा रही थी, ताकि उन्हें देखकर लोग भावुक हों और मदद के नाम पर पैसे दें।
भीख मांगने की तैयारी करते दिखे बच्चे
वीडियो में कुछ महिलाएं बच्चों के कान और शरीर पर दवा लगाती और फिर पट्टी बांधती दिखाई दे रही हैं। ऋतु के मुताबिक, बच्चों के कान में दवा न चली जाए, इसलिए वहां रुई लगाई जा रही थी। इसके बाद दवा और पट्टी के जरिए चोट को रियल दिखाने की कोशिश की जा रही थी। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में बच्चों को सच में क्रीम या दवा लगाई जा रही थी।
मां ने किया बहाना
ऋतु के मुताबिक वह काफी देर तक ऊपर से यह सब देख रही थीं। इसी दौरान जैसे ही वहां मौजूद एक महिला की नजर उनकी तरफ पड़ी, वह वहां से जाने लगी। इसके बाद ऋतु ने एक बच्चे से सीधे पूछ लिया कि क्या उसे चोट लगी है। बच्चे ने साफ शब्दों में कहा कि उसे कोई चोट नहीं लगी है। हालांकि, उसकी मां ने तुरंत कहा कि बच्चे को दाना है।
लोगों ने दी ऐसी प्रतिक्रियाएं
ऋतु ने इस पर सवाल किया कि अगर सिर्फ दाना है तो इतनी पट्टी क्यों बांधी गई है? वीडियो में वह लोगों को आगाह करती हैं और कहती हैं कि बरेली आने वाले लोग ऐसे चेहरों को पहचान लें। इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे लोगों को पैसे देने के बजाय खाना देना बेहतर है। वहीं एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि इसमें भी उन्हें मेहनत करनी पड़ रही है। एक और यूजर ने पूरे मामले को ‘मेकअप’ बताया।