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एक ऐसा पेड़, जिसकी सुरक्षा में 24 घंटे तैनात रहती है पुलिस, सालाना खर्च होते हैं 15 लाख रुपये

Mon, 23 Mar 2020 01:42 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पेड़ की सुरक्षा में तैनात जवान (फाइल फोटो) - फोटो : Social media
राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री या अन्य नेताओं की सुरक्षा में पुलिस या अन्य सुरक्षा बल तैनात हों, यह तो समझ में आता है, लेकिन किसी पेड़ को 24 घंटे सुरक्षा दी जाए, यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है। लेकिन यह बिल्कुल सच है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और विदिशा के बीच सलामतपुर की पहाड़ी पर एक ऐसा पेड़ है, जिसे किसी वीआईपी नेता की तरह सुरक्षा दी जाती है। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या खास है उस पेड़ में, तो चलिए इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। 
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पेड़ की सुरक्षा में तैनात जवान (फाइल फोटो) - फोटो : Social media
इस पेड़ की सुरक्षा में पुलिस के चार या पांच जवान तैनात हैं, जो 24 घंटे इसकी निगरानी करते हैं। इसके अलावा इसकी सिंचाई के लिए सांची नगरपालिका की ओर से अलग से एक पानी का टैंकर आता है। वहीं, कृषि विभाग के अधिकारी भी पेड़ की जांच के लिए यहां हर हफ्ते आते हैं। माना जाता है कि इस पेड़ के रखरखाव पर हर साल 12-15 लाख रुपये खर्च होते हैं।  
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भगवान बुद्ध (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
दरअसल, यह एक पीपल का पेड़ है, जिसे बोधि वृक्ष के नाम से जाना जाता है। साल 2012 में जब श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने भारत का दौरा किया था, उसी दौरान उन्होंने यह पेड़ लगाया था। आपको बता दें कि ईसा से 531 वर्ष पहले बोधि वृक्ष के नीचे ही भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। बौद्ध धर्म में इस वृक्ष का बेहद ही खास महत्व है। 

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श्रीलंका के अनुराधापुरा में मौजूद बोधि वृक्ष - फोटो : Social media
माना जाता है कि ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने अपने बेटे महेंद्र और बेटी संघमित्रा को बोधि वृक्ष की एक टहनी देकर बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए श्रीलंका भेजा था। उन्होंने वह बोधि वृक्ष श्रीलंका के अनुराधापुरा में लगाया था, जो आज भी मौजूद है। 
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बिहार के बोधगया में मौजूद महाबोधि वृक्ष - फोटो : Social media
जिस बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, असल में वह पेड़ बिहार के गया जिले में है। इस पेड़ को कई बार नष्ट करने का भी प्रयास किया गया था, लेकिन यह चमत्कार ही था कि हर बार एक नया वृक्ष उग आता था। हालांकि साल 1876 में यह पेड़ प्राकृतिक आपदा के चलते भी नष्ट हो गया था, जिसके बाद 1880 में अंग्रेज अफसर लॉर्ड कनिंघम ने श्रीलंका के अनुराधापुरम से बोधिवृक्ष की शाखा मंगवा कर उसे बोधगया में फिर से स्थापित कराया था। तब से वह वृक्ष आज भी वहां मौजूद है। 
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