कोरोना के योद्धा : लामा थुपस्टोन चोग्याल
- फोटो : Ladakh Heart Foundation Website
वह एकांतवास में रह रहे इस परिवार को दूर से ही देखकर ध्यान रखते कि उनकी देखभाल ठीक ढंग से हो रही है या नहीं। उन्होंने कहा कि एक दिन मैंने इस परिवार से बात करने के लिए एक मुस्लिम धर्मगुरु को फोन किया। उस धर्मगुरु ने इस परिवार से फोन पर बात की, मुझे लगता है जरूरत पड़ने पर वह दोबारा भी ऐसा करेंगे।
चोग्याल ने बताया कि लद्दाख के करीब 1200 श्रद्धालु इस स्वास्थ्य संकट से गुजर रहे हैं, वह ईरान में फंसे हैं। इनमें से ज्यादातर करगिल क्षेत्र के रहने वाले हैं। लद्दाख प्रशासन ने संस्थान से कहा है कि जो लोग दिल्ली या दूसरी जगहों से यहां लौटकर आ रहे हैं उन्हें क्वारंटीन में रखा जाए।
साल 1997 से लद्दाख हार्ट फाउंडेशन में काम कर रहे लामा चोग्याल इससे पहले दिल्ली में रहते थे। एक बार वह लद्दाख बौद्ध विहार की यात्रा पर आए और देखा कि यहां लोग बीमार हैं, जिनमें कई सारे बच्चे हैं, और हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं।
वह कुछ करना चाहते थे, तब उन्होंने इलाज के लिए एक स्थानीय चिकित्सक से सलाह-मशविरा किया। डॉक्टर ने बड़ी मात्रा में पेनिसिलिन खरीदने और गांवों में वितरित करने के लिए कहा, साथ ही लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए भी कहा। लामा ने कहा कि इसके बाद मैंने 24,000 रुपये में पेनिसिलिन की दवा खरीदी।