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Zara Hatke: मगरमच्छ की मौत पर फूट-फूटकर रोए गांव वाले, फूल चढ़ाकर पूरे सम्मान के साथ की विदाई, जानें क्यों

Wed, 28 May 2025 10:03 AM IST
दीक्षा पाठक फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Zara Hatke: गंगाराम बहुत शांत और समझदार था। आमतौर पर मगरमच्छ खतरनाक माने जाते हैं, लेकिन गंगाराम ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। गांव के बच्चे तालाब के पास खेलते थे और महिलाएं वहीं कपड़े धोती थीं, लेकिन किसी को उससे डर नहीं लगता था।
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मगरमच्छ की धूमधाम से हुई अंतिम विदाई - फोटो : एक्स
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सोशल मीडिया पर कई बार ऐसे वीडियोज भी वायरल होते हैं, जिसे देखकर हम यह सोचते हैं कि आखिर इस चीज को करने के पीछे की क्या कहानी रही होगी। अब हाल ही में, इंटरनेट पर एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है। यह कहानी है छत्तीसगढ़ के बावा मोहतारा गांव की। छत्तीसगढ़ के बावा मोहतारा गांव में एक खास मगरमच्छ रहता था, जिसका नाम था गंगाराम। वह कोई आम मगरमच्छ नहीं था, बल्कि गांव के लोगों का दोस्त और परिवार का हिस्सा बन चुका था। गंगाराम ने करीब 130 साल तक गांव के तालाब में शांति से जीवन बिताया और साल 2019 में उसकी मौत हो गई। हालांकि, लोगों ने उसका अंतिम संस्कार काफी रीति-रिवाज के साथ किया। तो आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है।

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मगरमच्छ की क्या है कहानी?
गंगाराम बहुत शांत और समझदार था। आमतौर पर मगरमच्छ खतरनाक माने जाते हैं, लेकिन गंगाराम ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। गांव के बच्चे तालाब के पास खेलते थे और महिलाएं वहीं कपड़े धोती थीं, लेकिन किसी को उससे डर नहीं लगता था। गांववालों को उस पर पूरा भरोसा था। गांव के लोग गंगाराम को इतना चाहते थे कि उन्होंने अपने गांव को ही मगरमच्छ वाला गांव कहना शुरू कर दिया था। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई गंगाराम को जानता था और पसंद करता था। वह सिर्फ एक जानवर नहीं था, गांव का सदस्य बन गया था।

मगरमच्छ की मौत से सदमे में आ गए गांव वाले
जब जनवरी 2019 में गंगाराम की प्राकृतिक रूप से मौत हुई तो पूरे गांव में शोक फैल गया। करीब 500 लोग उसकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। उसे फूलों की माला पहनाकर ट्रैक्टर पर बैठाया गया और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उस दिन कई घरों में खाना तक नहीं बना क्योंकि लोग बहुत दुखी थे। हालांकि, यह कहना गलत नहीं होगा कि गंगाराम की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर इंसान और जानवर के बीच विश्वास और प्यार हो, तो वे अच्छे दोस्त बन सकते हैं। गांववाले आज भी उसे याद करते हैं और उसका सम्मान करते हैं। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ लोगों ने  इसपर बेहद अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी। एक यूजर ने कहा, "सच में जानवर कोई भी हो, अगर वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है तो सबका चहेता बन जाता है।" दूसरे यूजर ने लिखा, "मैं यह कहानी पढ़कर रो रहा हूं।" एक और यूजर ने लिखा, "अब तो मुझे भी गंगाराम की मौत पर रोना आ रहा है।"

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