ईरान में एक अमेरिकी F-15 फाइटर जेट क्रैश हो गया था। इसके पायलट ने दावा किया है कि उसने क्रैश हुए फाइटर जेट से इजैक्ट होने से ठीक पहले आसमान में ईरानी ड्रोन्स की ऐसी श्रृंखला देखी, जो जेलीफिश की तरह आसमान में तैर रही थी। ड्रोन्स का यह झुंड आपस में ऐसे जुड़ा था कि वे सभी मिलकर एक विशालकाय जीव की तरह हिल रहे हैं। इस सनसनीखेज खुलासे ने अमेरिकी डिफेंस अधिकारियों के बीच बहस छेड़ दी है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट के इस बयान की जानकारी रखने वाले चार सूत्रों के हवाले से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अप्रैल में जब ईरान ने F-15 फाइटर जेट को मार गिराया था, तो पायलट ने विमान छोड़ने से कुछ सेकंड पहले की ऐसी कहानी बताई है, जिसने अमेरिकी खुफिया एजेंसियो को हिला दिया है। पायलट ने बताया कि आसमान में कई ड्रोन्स एक मिले हुए थे और एक ही दिशा में बेहद सटीक तालमेल के साथ आगे बढ़ रहे थे।
Larry The Cat: ब्रिटेन के 7 साल में बदल गए 6 प्रधानमंत्री, लेकिन नहीं गई इस बिल्ली की कुर्सी, आखिर कौन है लैरी
खुफिया एजेंसियों ने जताया संदेह
खुफिया अधिकारियों के बीच पायलट के दावों पर शक है। संदेह की वजह क्रैश के दौरान पायलट के सिर में आई चौट थी, क्योंकि इस लड़ाई के बीच वह दूसरी बार क्रैश का शिकार हुआ था। इससे पहले वो कुवैत की सेना की गलती से अपनी ही फोर्स पर हमले में बाल-बाल बच गया था। अब खुफिया अधिकारी इस उलझन में हैं कि क्या सच में पायलट ने ईरान की किसी ऐसी सीक्रेट तकनीक को देखा है जिसके बारे में अमेरिका को जानकारी नहीं थी? या युद्ध के तनाव में कोई भ्रम था। पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने पायलट से स्पष्ट शब्दों में कहा कि क्या यह पक्का है कि आपने जो देखा वो सच था?
Aliens News: इंसानों हम आ चुके हैं..., आधी रात लोगों के फोन पर आया एलियन अटैक का मैसेज, इस देश में मचा हड़कंप
कैसे गिरा था अमेरिका का घातक लड़ाकू विमान?
क्यों अमेरिकी F-15 जेट गिरा था? अभी इस सवाल का जवाब अमेरिका सेना नहीं खोज पाई है और असली वजह कि जांच जारी है। हालांकि, शुरुआती रिपोर्ट्स में संकेत मिलता है कि ईरान ने इसी जेलीफिश ड्रोन फॉर्मेशन की मदद से अमेरिकी जेट को मार गिराया था। यह पहली बार था जब ईरान ने अपनी धरती पर किसी अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया था।
Hottest Places: कहां हैं दुनिया की 5 सबसे गर्म जगहें? सिर्फ कुछ ही घंटे में हो सकती मौत
क्या होती है मेश्ड नेटवर्किंग तकनीक?
तकनीकी भाषा में ड्रोन्स के के ऐसे आपस में जुड़े और एक साथ काम करने की क्षमता को वन-टू-मेनी मेश्ड नेटवर्किंग कहते हैं। सीधे शब्दों में इसका मतलब है कि इस तकनीक से जमीन पर बैठा सिर्फ एक ऑपरेटर एक साथ दर्जनों या सैकड़ों ड्रोन्स को कंट्रोल कर सकता है। यह सभी ड्रोन्स आपसा में डेटा साझा करते हैं और झुंड की तरह हमला करते हैं।