प्रतीकात्मक तस्वीर
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जीन जिस तरह बर्फ की मूर्ति में बदल चुकी थी, वैसे में डॉक्टरों को भी लग रहा था कि जीन के जिंदा होने की उम्मीद तो बिल्कुल भी नहीं होगी। उसके शरीर का तापमान लेना भी लगभग मुश्किल था, क्योंकि उसका पूरा शरीर अकड़ चुका था। न तो बांहें उठाई जा सकती थीं और ना ही उसका मुंह ही खोला जा सकता था। वैसे आमतौर पर इंसान का दिल एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कता है, लेकिन बर्फ में जमे होने की वजह से जीन की धड़कन एक मिनट में महज 12 बार ही धड़क रही थी। जीन को ऐसी हालत में जिसने भी देखा, उसने कहा कि इसे तो बस भगवान ही बचा सकते हैं। डॉक्टरों को भी ऐसा लग रहा था कि अगर किसी तरह जीन को बचा भी लिया गया तो उसका दिमाग काम नहीं करेगा और वो अपने शरीर को हिला भी नहीं पाएगी।