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यूनिट 731: इतिहास का सबसे खौफनाक टॉर्चर हाउस, जहां जिंदा इंसानों पर होते थे खतरनाक प्रयोग

Thu, 23 Apr 2020 05:50 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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यूनिट 731 - फोटो : Social media
यूनिट 731, शायद आपने यह नाम भी न सुना हो, लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यह दुनिया के सबसे खतरनाक प्रयोगशालाओं में से एक था। असल में यह जापानी सेना द्वारा बनाई गई एक ऐसी गुप्त लैब (प्रयोगशाला) थी, जिसे इतिहास का सबसे खौफनाक टॉर्चर हाउस माना जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यहां जिंदा इंसानों पर ऐसे-ऐसे खतरनाक प्रयोग किए जाते थे, जिसके बारे में जानकर लोगों की रूह तक कांप जाती है। यह लैब भले ही चीन के पिंगफांग जिले में था, लेकिन इसका संचालन जापानी सेना करती थी। 

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यूनिट 731 में किए गए इंसानी प्रयोग की एक दर्दनाक तस्वीर - फोटो : Social media
दरअसल, यूनिट 731 को जापानी सेना ने जैविक हथियार बनाने के लिए शुरू किया था, ताकि वो अपने दुश्मनों पर इसका इस्तेमाल कर सकें। वो यहां जिंदा इंसानों के शरीर में खतरनाक वायरस और केमिकल्स डालकर उनपर प्रयोग करते थे। इंसानों को इस लैब में ऐसी-ऐसी यातनाएं दी जाती थीं, जिसके बारे में शायद ही आपने कभी सोचा हो। 

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यूनिट 731 - फोटो : Social media
इस लैब में चीन, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से पकड़े गए लोगों पर जानवरों की तरह प्रयोग होते थे। इस क्रम में कई लोग तो तड़प-तड़प कर मर जाते थे, लेकिन जो जिंदा बच जाते थे, उन्हें मार दिया जाता था और यह देखने के लिए उनकी चीड़-फाड़ की जाती थी कि आखिर वो बच कैसे गया। कहते हैं कि ऐसे प्रयोग करने के लिए 3000 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। 

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यूनिट 731 में किया गया खतरनाक प्रयोग (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
फ्रॉस्टबाइट टेस्टिंग नाम के इस प्रयोग में इंसान के हाथ-पैर को पानी में डुबा दिया जाता था और वो जब तक जम न जाए, तब तक पानी को ठंडा किया जाता था। इसके बाद जमे हुए हाथ-पैरों को गर्म पानी में पिघलाया जाता था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अलग-अलग तापमान  का इंसानी शरीर पर किस तरह का प्रभाव पड़ता है। इस खतरनाक प्रयोग में कई लोगों की जान तक चली जाती थी। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कई बार ऐसा भी होता था कि इंसानों के शरीर में पहले खतरनाक वायरस डाला जाता था और उसके बाद उनके प्रभावित अंगों को यह देखने के लिए काट दिया जाता था कि बीमारी आगे भी फैलती है या नहीं। वैसे तो इस खतरनाक प्रयोग में कई लोग अपनी जान गंवा देते थे, लेकिन जो बच जाते थे, उनके ऊपर फिर 'गन फायर टेस्ट' किया जाता था, ताकि यह जाना जा सके कि बंदूक इंसानी शरीर को कितना नुकसान पहुंचा सकती है। 
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यूनिट 731 के खंडहर - फोटो : Social media
यूनिट 731 का सबसे खतरनाक प्रयोग यह था कि बंधक बनाए गए पुरुषों और महिलाओं को शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था। इसमें से किसी एक के शरीर में पहले से ही बीमारी फैलाने वाला वायरस डाल दिया जाता था और इस प्रयोग के जरिए यह जानने की कोशिश की जाती थी कि साइफिल्स जैसी सेक्शुअल ट्रांसमिटेड बीमारी आखिर फैलती कैसे है। इसके अलावा कई महिलाओं के शरीर में वायरस डालने के बाद उन्हें गर्भवती भी बनाया जाता था, ताकि यह देखा जा सके कि नवजात पर उस वायरस का क्या असर होता है। इस क्रम में तो कई महिलाओं की मौत भी हो जाती थी।  
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यूनिट 731 - फोटो : Social media
चीन के पिंगफांग में मौजूद यूनिट 731 खतरनाक प्रयोग करने वाला कोई इकलौता लैब नहीं था बल्कि चीन में इसकी और भी कई शाखाएं थीं, जिनमें लिंकोउ (ब्रांच 162), मु़डनजियांग (ब्रांच 643), सुनवु (ब्रांच 673) और हैलर (ब्रांच 543) शामिल थे। हालांकि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इन सारी प्रयोगशालाओं में खतरनाक प्रयोग करने का काम रूक गया और ये जगहें वीरान हो गईं। अब तो इनमें से कई जगहों पर लोग घूमने के लिहाज से भी आते हैं। 
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