कहते हैं, छोटी-सी गलती भी कई बार बड़ी मुसीबत बन जाती है। अहमदाबाद में एक ऐसा ही अजीब मामला सामने आया, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। हुआ यूं कि एक महिला ने अपनी रिश्तेदार की शादी के लिए खास डिजाइनर ब्लाउज सिलवाने का ऑर्डर दिया, लेकिन दर्जी ने ऐसी गड़बड़ी कर दी कि बात सीधे कोर्ट तक पहुंच गई। आखिर में फैसला महिला के हक में आया और अब यही मामला सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी घटना के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
महिला ने दिया ब्लाउज बनाने के ऑर्डर
दरअसल अहमदाबाद के अंकुर इलाके में रहने वाली पूनमबेन पारिया नाम की महिला ने एक बुटीक से ब्लाउज सिलवाने का ऑर्डर दिया था। ब्लाउज बहुत खास था क्योंकि वो उनके परिवार की शादी में पहनने के लिए था। पूनमबेन ने दर्जी को पहले ही 4395 रुपये एडवांस में दे दिए थे। दर्जी ने भी वादा किया था कि ब्लाउज शादी से कम से कम एक हफ्ते पहले तैयार हो जाएगा, ताकि किसी तरह की दिक्कत न हो।
महिला ने दर्जी पर ठोका केस
लेकिन जैसे-जैसे शादी की तारीख नजदीक आती गई। वैसे-वैसे दर्जी के वादे भी हवा होते गए। पूनमबेन बार-बार दुकान पर जातीं और हर बार दर्जी कहता, “बस थोड़ा काम बाकी है, कल तक मिल जाएगा।” मगर वो “कल” कभी आया ही नहीं। आखिर शादी का दिन आ गया और ब्लाउज अभी भी अधूरा था। नतीजा ये हुआ कि पूनमबेन को मजबूरन दूसरा कपड़ा पहनकर शादी में जाना पड़ा, उन्होंने बाद में बताया कि “शादी का सारा जोश खत्म हो गया क्योंकि जिस पोशाक का सपना देखा था, वो पहन ही नहीं पाई।”
मिला इतना मुआवजा
शादी के बाद उन्होंने दर्जी से पैसे वापस मांगे, तो उसने साफ इंकार कर दिया। दर्जी ने कहा, “पैसे वापस नहीं मिलेंगे, आप चाहें तो ब्लाउज ले जाइए।” ये बात पूनमबेन को बहुत खल गई, उन्होंने सोचा कि अब तो न्याय ही रास्ता है और जून 2025 में सीधे अहमदाबाद जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर दी। कोर्ट में मामला पहुंचा तो दर्जी ने शुरुआत में पेश ही नहीं हुआ। बाद में जब जांच और सुनवाई हुई, तो आयोग ने साफ कहा कि दर्जी ने “सेवा में लापरवाही” की है और ग्राहक को मानसिक नुकसान पहुंचाया है। नतीजतन अदालत ने दर्जी को आदेश दिया कि वह पूनमबेन को उनके 4395 रुपये ब्याज सहित लौटाए। इसके अलावा 5000 रुपये मानसिक परेशानी के लिए और 2000 रुपये कानूनी खर्च के लिए देने होंगे। कुल मिलाकर करीब 11500 रुपये की रकम दर्जी को चुकानी पड़ी।