एक जमाना था जब दुनिया के एक बड़े हिस्से पर अंग्रेजों का राज था। कहा जाता था कि ब्रिटिश साम्राज्य में सूरज नहीं अस्त होता। मगर, उस दौर में भी दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऐसा था, जहां अंग्रेजों का नहीं, दूसरे यूरोपीय देशों का राज था। मध्यकाल में यूरोपीय देश स्पेन का दुनिया के एक बड़े हिस्से पर राज हुआ करता था। खास तौर से अमेरिकी महाद्वीपों पर।
आज के अमेरिका और कनाडा को छोड़ दें तो, बाकी अमेरिकी महाद्वीप पर स्पेन का ही राज था। कमोबेश पूरे के पूरे दक्षिण अमेरिका में स्पेनिश ही बोली जाती है, सिवा एक देश के और इस देश का नाम है ब्राजील। सवाल ये है कि ऐसा क्यों था? जब पूरा का पूरा दक्षिण अमेरिका स्पेनिश बोलता है, तो ब्राजील में पुर्तगाली क्यों बोली जाती है?
लैटिन अमेरिका में ब्राजील ऐसा देश है, जो पुर्तगाल का उपनिवेश था। बाकी दक्षिणी अमेरिका, स्पेन के साम्राज्य का हिस्सा था। ब्राजील और बाकी अमेरिका की किस्मत का फैसला एक छोटे से गांव में हुआ था। ये गांव आज के स्पेन के वलाडोलिड सूबे में पड़ता है।
इस गांव का नाम है टॉर्डेसियास। यहीं पर 1494 में स्पेन और पुर्तगाल के बीच समझौता हुआ था। जिसके तहत दोनों देशों ने नई दुनिया को आपस में बांटा था। ये नई दुनिया आज के अमेरिकी महाद्वीप थे। इनकी तलाश इटली के नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस ने की थी। हालांकि कोलंबस, भारत की तलाश में स्पेन के खर्च पर रवाना हुए थे, मगर वो पहुंच गए अमेरिका।
स्पेन का दक्षिण अमेरिका से नाता
टॉर्डेसियास आज गांव नहीं बल्कि छोटा सा शहर बन गया है। ये डुएरो नदी के किनारे स्थित है। बेहद औसत दर्जे का ये शहर नई और पुरानी विरासतों का मेल है। यहां पुराने जमाने की कई इमारतें हैं। भले ही स्पेन में इस शहर को लोग न जानते हों, मगर लैटिन अमेरिका में बहुत से लोगों को इस शहर के बारे में पता है।
इतिहासकार बताते हैं कि ये शहर मध्य काल में छोटा सा गांव था। इसके आस-पास से कई अहम रास्ते गुजरते थे, इसी वजह से पुर्तगाल और स्पेन के राजाओं ने इस जगह को इतने अहम समझौते के लिए चुना। यहां पर पुराने राजमहल और दूसरी शानदार इमारतें भी थीं। ये भी समझौते के लिए इस कस्बे को चुनने की बड़ी वजह थी।
पंद्रहवीं सदी के आखिर में आज का स्पेन किंगडम ऑफ कस्टील के नाम से जाना जाता था। इसके एक हिस्से पर अरागॉन सल्तनत थी। वहीं पड़ोस में पुर्तगाल स्थित था। जब कोलंबस अमेरिका का पहला सफर करके लौट रहे थे, तो समुद्री तूफान की वजह से कोलंबस को अपने जहाज पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में रोकने पड़े। मजबूरन कोलंबस को नई दुनिया की अपनी खोज के बारे में पुर्तगाल के राजा जॉन द्वितीय को बताना पड़ा।