बरसों से पढ़ाई के लिए घर से दूर रहने वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ी समस्या होती है मकान का किराया। खासकर जब बात विदेश की हो तो किराए की रकम इतनी ज्यादा होती है कि छात्र परेशान हो जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो छात्रों के साथ। किराए का खर्चा इतना बढ़ गया कि दोनों ने एक अनोखा उपाय निकाला। उन्होंने मकान छोड़कर एक पुरानी खटारा डबल डेकर बस खरीद ली और उसे ही घर बना लिया। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी घटना के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
किराए के मकान में रह रहे थे दोनों लड़के
ये दोनों छात्र हैं 20 साल के लियो बेवन और किट रेनशॉ। दोनों अपने कोर्स के आखिरी साल में हैं। उन्हें हर साल लाखों रुपये किराए में देने पड़ते थे। लियो ने पहले साल हॉस्टल में रहने के लिए लगभग 7.5 लाख रुपये चुकाए थे। दूसरे साल साझा मकान में रहने पर 6.5 लाख रुपये देने पड़े। तीसरे साल किराया करीब 10-11 लाख रुपये तक पहुंच जाता, जो उनके लिए बहुत मुश्किल था। किट की हालत भी वैसी ही थी।
लड़कों ने खरीदी पुरानी डेकर बस
इतनी बड़ी रकम चुकाना दोनों के लिए असंभव था। इसके अलावा लियो ने बताया कि पहले जिस हॉस्टल में रहता था, वहां उसे आठ लोगों के साथ एक जगह शेयर करनी पड़ती थी। इससे न तो प्राइवेसी मिलती थी और न ही आराम से पढ़ाई हो पाती थी। यही वजह थी कि उन्होंने जून 2024 में फेसबुक मार्केटप्लेस पर नजर डाली और वहां से एक पुरानी डबल डेकर बस खरीद ली।
डेकर बस को बनाया घर
बस खरीदने में उन्हें करीब 5.9 लाख रुपये खर्च करने पड़े। यह बस चलने की हालत में नहीं थी, इसलिए लिवरपूल से ऑक्सफोर्ड लाने के लिए उन्हें करीब 1.5 लाख रुपये और देने पड़े। अब उन्होंने इस बस को एक पार्किंग एरिया में खड़ा कर लिया है, जहां उन्हें हर हफ्ते 73 पाउंड करीब 8690 रुपये देने पड़ते हैं। इस तरह पूरे साल में उनका लगभग करीब 2.9 से 4 लाख रुपये बच जाएगा।
बस में बनाया अपना आशियाना
बस को घर बनाने का काम दोनों ने खुद शुरू किया। जब उन्होंने बस साफ की तो उसमें से मरे हुए चूहे, सुई और फफूंदी जैसी चीजें निकलीं। उन्होंने ड्राइवर की सीट, यात्री सीटें, टेबल और ऊपर का हिस्सा हटा दिया। हीटिंग और कूलिंग सिस्टम भी निकाल दिया गया। हालांकि, बस की असली लेदर सीटें, अलमारी, टीवी और साउंड सिस्टम को उन्होंने बचा लिया। अब वे बिजली के लिए जनरेटर और बैटरी का इस्तेमाल करते हैं। ओवन एलपीजी सिलेंडर से चलता है। फिलहाल बस में नहाने की सुविधा नहीं है, इसलिए दोनों अपने दोस्तों के घर जाकर स्नान कर रहे हैं। अभी फर्श, दीवारें, किचन और टॉयलेट पर काम बाकी है। इसके बावजूद दोनों बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि यह अनुभव चुनौती भरा तो है, लेकिन मजेदार भी है।उन्हें भरोसा है कि जल्द ही यह बस पूरी तरह रहने लायक बन जाएगी।