वासा के सुरक्षित रहने की एक वजह ये थी कि यह बाल्टिक सागर में डूबा था। बाल्टिक सागर में ठंड और ऑक्सीजन की कमी के कारण यह जहाज बैक्टीरिया और लकड़ी खाने वाले कीडों से बचा रह गया। बाल्टिक सागर के ताजे पानी में लकड़ियों को खाने वाले कीड़े उतने नहीं होते जितने खारे पानी में होते हैं। म्यूजियम ने इस जहाज के डूबने और 300 साल बाद इसे निकालने की एक वीडियो डॉक्यूमेंट्री भी बनवाई है, जिसे यहां आने वाले दर्शकों को दिखाया जाता है। अब कई सालों बाद इस जहाज के दोबारा डूब जाने की आशंका हो रही है। यह जहाज एक तरफ झुकना शुरू हो गया है।
दोबारा डूबने का खतरा
पोत शिल्प के विशेषज्ञ नहीं चाहते कि वासा की त्रासदी का इतिहास फिर से दोहराया जाए, इसलिए जहाज की मरम्मत की जा रही है ताकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे। म्यूजियम की डायरेक्टर लीसा मैन्सन कहती हैं, 'यदि हम कुछ न करें तब भी यह जहाज साल में एक मिलीमीटर झुक रहा है। हम नहीं चाहते कि आगे भी ऐसा ही होता रहे, क्योंकि ऐसा होने पर एक समय आएगा जब जहाज पूरी तरह पलटकर डूब जाएगा।'
वासा का वास्तु, मस्तूल पतवार और इसकी नक्काशी असाधारण है। इसीलिए पुरातत्वविदों की देखरेख में इसके संरक्षण का काम चल रहा है। लीसा मैन्सन कहती हैं, 'कई लोग मुझसे पूछते हैं कि यह संग्रहालय इतना सफल कैसे है क्योंकि इसकी बुनियाद एक नाकामी पर टिकी है। मुझे लगता है कि नाकामियां इंसान के क्रमिक विकास के अहम हिस्से हैं। कामयाबी पाने के लिए हमें नाकाम होने का जोखिम उठाने से घबराना नहीं चाहिए।'