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वो महिला, जो रातों-रात बन गई थी 24,000 करोड़ की मालकिन, हुआ था कुछ ऐसा

Thu, 30 Jul 2020 04:04 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक कहावत है कि भगवान जब भी देता है, छप्पड़ फाड़ कर देता है। कई लोगों पर यह बात बिल्कुल सटीक बैठती है। इन्ही में से एक है चीन की रहने वाली एक महिला, जिसकी किस्मत रातों-रात ऐसी पलटी कि वो एक झटके में अरबों-खरबों की मालकिन बन गई। जी हां, यह बिल्कुल सच है। इसी साल मई महीने में यह महिला अमीर बनी है, जिसका नाम है युआन लिपिंग। इसी के साथ युआन दुनिया की सबसे अमीर महिलाओं की सूची में भी शामिल हो गई थीं। ऐसे में यह सवाल आपके मन में जरूर उठ रहा होगा कि ऐसा कौन सा खजाना युआन के हाथ लग गया था कि वो रातों-रात अमीर बन गई थीं। तो आइए इस राज से भी पर्दा उठा देते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, चीन की एक वैक्सीन बनाने वाली कंपनी शेंझेन कंगटाई बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स कंपनी के चेयरमैन हैं ड्यू वेइमिन (56) और उन्ही की पूर्व पत्नी हैं युआन लिपिंग (49)। मई महीने में आपसी सहमति से दोनों का तलाक हुआ था। यह दुनिया के सबसे महंगे तलाक में से एक था।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तलाक से पहले तक ड्यू वेइमिन के पास 6.3 अरब डॉलर यानी लगभग 47,250 करोड़ की संपत्ति थी, लेकिन तलाक के बाद मुआवजे के तौर पर उन्हें अपनी पत्नी युआन लिपिंग को कंपनी के 161.3 करोड़ शेयर देने पड़े थे। गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय उन शेयरों की कीमत 3.2 अरब डॉलर यानी करीब 24,000 करोड़ रुपये थी। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तलाक के बाद ड्यू वेइमिन की कुल संपत्ति घटकर लगभग 3.1 अरब डॉलर यानी 23,250 करोड़ रुपये हो गई थी। हालांकि इसमें गिरवी रखे गए शेयरों की कीमत को शामिल नहीं किया गया था।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ड्यू वेइमिन का जन्म 1963 में एक किसान परिवार में हुआ था। उनका बचपन बिल्कुल साधारण रहा है। उन्होंने 1984 में एक स्थानीय स्वास्थ्य विद्यालय में अध्ययन शुरू किया और 1987 में जियांग्सी प्रांतीय स्वास्थ्य और महामारी निवारण स्टेशन में एक निरीक्षक के रूप में उन्हें पहली नौकरी मिली। उनका भाग्य तब बदल गया जब उन्होंने 1990 के दशक में एक वैक्सीन कंपनी में सेल्समैन बनने के लिए निरीक्षक की नौकरी छोड़ दी। उनकी मेहनत और लगन को देखकर 1995 में उन्हें उस कंपनी का सेल्स मैनेजर बना दिया गया। इसके बाद साल 2009 में उन्होंने कंपनी का अधिग्रहण कर लिया और उसके चेयरमैन बन गए। 
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