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Viral Post: 'वीकेंड पर भी नहीं मिलता आराम'... स्टार्टअप इंटर्न की आपबीती वायरल, लोगों ने कंपनी को घेरा

Sat, 01 Aug 2026 10:58 AM IST
दीक्षा पाठक फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Viral Post: रेडिट पर एक 25 वर्षीय युवक की पोस्ट ने स्टार्टअप कल्चर को लेकर नई बहस छेड़ दी है। युवक का दावा है कि वह पिछले 10 महीनों से एक फिनटेक स्टार्टअप में इंटर्न के तौर पर 12 से 16 घंटे तक काम कर रहा है, लेकिन अब तक उसे फुल-टाइम नौकरी नहीं मिली। उसकी कहानी पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिक्रिया दी और कई यूजर्स ने दूसरी नौकरी तलाशने की सलाह दी।
 
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ऑफिस के दबाव में उड़ी थी रातों की नींद - फोटो : AI
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विस्तार
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स्टार्टअप्स को अक्सर युवाओं के लिए सीखने, तेजी से आगे बढ़ने और नए अवसरों का सबसे अच्छा मंच माना जाता है। लेकिन हर अनुभव उम्मीदों जैसा नहीं होता। कई बार युवा लंबे समय तक पूरी मेहनत से काम करते हैं, फिर भी उन्हें अपने भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता। ऐसी ही एक कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर सामने आई है, जिसने स्टार्टअप्स के वर्क कल्चर पर चर्चा शुरू कर दी है। तो आइए विस्तार से जानते हैं।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
25 वर्षीय एक युवक ने अपनी पोस्ट में बताया कि वह पिछले 10 महीनों से एक फिनटेक स्टार्टअप में इंटर्न के रूप में काम कर रहा है। उसका दावा है कि कंपनी उससे रोजाना 12 से 16 घंटे तक काम करवाती है। इतना ही नहीं, शनिवार और रविवार को भी उसे आराम नहीं मिलता। कई बार वीकेंड पर कंपनी के को-फाउंडर का संदेश आते ही उसे तुरंत लैपटॉप खोलकर काम शुरू करना पड़ता है। इसके बावजूद उसे अब तक स्थायी नौकरी का ऑफर नहीं मिला है।

इंटर्नशिप पूरी होने से पहले ही हुई छटनी
रेडिट यूजर ने बताया कि उसने 2024 में ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद कंपनी की प्रोडक्ट टीम में छह महीने की इंटर्नशिप शुरू की थी। शुरुआत में उसे भरोसा दिलाया गया था कि अगर उसका प्रदर्शन अच्छा रहा तो उसे फुल-टाइम रोल दिया जाएगा। हालांकि, इंटर्नशिप पूरी होने से पहले ही कंपनी में कर्मचारियों की छंटनी शुरू हो गई। इसके बाद मैनेजमेंट ने उससे कहा कि हालात नॉर्मल होते ही उसे स्थायी नौकरी दी जाएगी। इसी भरोसे पर उसकी इंटर्नशिप पहले तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई। जब वह समय भी पूरा हो गया, तब भी फुल-टाइम ऑफर देने के बजाय केवल एक महीने का और एक्सटेंशन दे दिया गया।
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ऑफिस के दबाव में उड़ी थी रातों की नींद
युवक का कहना है कि जब भी वह अपने भविष्य के बारे में पूछता है, उसे एक ही जवाब मिलता है,"थोड़ी और मेहनत करो और ज्यादा जिम्मेदारी उठाओ।"
पोस्ट के मुताबिक, ऑफिस वाले दिनों में उसका काम सुबह करीब 10 या 11 बजे शुरू होता है और रात 9 बजे तक चलता है। वहीं वर्क फ्रॉम होम के दौरान कोई तय समय नहीं होता। कई बार उसे पूरी रात जागकर सुबह 6 बजे तक काम करना पड़ा। रात का खाना खाने के बाद भी लैपटॉप बंद नहीं हो पाता। लगातार बढ़ते काम के दबाव का असर अब उसकी नींद, मानसिक शांति और स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है।

लोगों ने मांगी राय
युवक ने अपनी सबसे बड़ी चिंता भी साझा की। उसका कहना है कि अगर वह बिना फुल-टाइम ऑफर के नौकरी छोड़ देता है तो उसे डर है कि उसके 10 महीने की मेहनत बेकार मानी जाएगी। उसे यह भी चिंता है कि लंबे समय तक केवल इंटर्न बने रहने से उसके करियर पर सवाल उठ सकते हैं। इसी वजह से वह तनाव और असमंजस में है। अपनी पोस्ट में उसने लोगों से सलाह मांगी कि क्या अब उसे यह कंपनी छोड़कर नई नौकरी तलाशनी चाहिए या फिर फुल-टाइम ऑफर की उम्मीद में यहीं काम करते रहना चाहिए। उसने यह भी साफ लिखा कि उसे "और मेहनत करो" जैसी सलाह नहीं चाहिए क्योंकि उसके मुताबिक वह पहले ही अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा है।

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