रेड स्प्राइट्स ऊपरी वायुमंडल में होने वाली एक खास विद्युत घटना हैं। इस तरह की घटनाओं को वैज्ञानिक भाषा में ट्रांजिएंट लुमिनस इवेंट्स कहा जाता है। सामान्य बिजली जहां बादलों से जमीन की तरफ गिरती है, जबकि स्प्राइट्स बादलों के ऊपर की दिशा में जाते हैं। यह आमतौर पर धरती की सतह से 50 से 90 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित मेसोस्फीयर में नजर आते हैं।
इनका रंग लाल होता है। आकार में यह जेलीफिश, गाजर या बड़े-बड़े खंभों जैसे नजर आते हैं और कई किलीमीटर तक फैल सकते हैं। इसकी वजह यह है कि कम दबाव वाले ऊपरी वायुमंडल में नाइट्रोजन के अणु विद्युत ऊर्जा से उत्तेजित होकर लाल प्रकाश उत्सर्जित करते हैं। कई मामलों में ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से हरे रंग के घोस्ट स्प्राइट्स का भी निर्माण होता है। हालांकि इनका जीवनकाल सिर्फ कुछ मिलीसेकंड का होता है। इसके कारण इन्हें सामान्य आखों से देखना कठिन है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, रेड स्प्राइट्स के निर्माण के लिए शक्तिशाली तूफानों की जरूरत होती है। जब बादलों से जमीन पर अत्यधिक ऊर्जा वाली पॉजिटिव बिजली गिरती है, तब एक मजबूत विद्युत क्षेत्र बनता है जो ऊपरी वायुमंडल तक पहुंच जाता है। कम वायुदाब की वजह से वहां विशाल विद्युत डिस्चार्ज होता है और स्प्राइट्स दिखाई देते हैं। आमतौर पर जब रात में तूफान बहुत सक्रिय होते हैं, तो यह स्प्राइट्स बनते हैं। वीडियो में स्प्राइट्स आतिशबाजी या जेलीफिश की तरह नजर आते हैं, जो देखने वालों को हैरान कर देते हैं।
डोंग शूचांग ने बताया कि उन्होंने बीते चार वर्षों में सबसे साफ और शानदार स्प्राइट रिकॉर्ड किया था। वीडियो में लाल और हरे प्रकाश की यह आकृति किसी आतिशबाजी या अंतरिक्षीय जेलीफिश जैसे नजर आती हैं। इससे पहले वर्ष 2022 में भी उन्होंने अपनी सहयोगी एंजेल आन के साथ इसी इलाके में 100 से ज्यादा स्प्राइट्स रिकॉर्ड किए थे, जिन्हें दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा स्प्राइट आउटब्रेक माना गया था।
वैज्ञानिकों के लिए रेड स्प्राइट्स सिर्फ आकर्षक नजारा नहीं हैं, बल्कि वो पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल, आयनोस्फीयर और तूफानी प्रणालियों के बीच संबंधों को समझने का महत्वपूर्ण जरिया भी हैं। तिब्बत जैसे ऊंचे और स्वच्छ वातावरण वाले इलाकों में इनका अध्ययन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकता है। इस घटना एक बार फिर पता चलता है कि प्रकृति अभी भी अनेक अनसुलझे रहस्यों और अद्भुत दृश्यों से भरी है।