हेड कांस्टेबल संग जाम छलकाते दिखे SI साहब
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समाज में जब किसी भी तरह की बुरी आदतों को खत्म करने की बात आती है तो सबसे पहला जिम्मा पुलिस और प्रशासन पर ही होता है। लोग मानते हैं कि कानून व्यवस्था संभालने वाले अधिकारी और कर्मचारी अगर खुद साफ-सुथरी और अनुशासन वाली जिंदगी जिएंगे तो आम जनता पर भी उसका अच्छा असर पड़ेगा। लेकिन अगर वही पुलिस जो नशा मुक्ति अभियान चलाकर लोगों को नशे से दूर रहने की सलाह देती है, खुद शराब पीती हुई नजर आए तो सोचिए समाज पर उसका क्या असर पड़ेगा। क्या लोग उस अभियान को गंभीरता से लेंगे? क्या लोग सच में नशा छोड़ने की कोशिश करेंगे? तो आज की इस खबर में हम भी आपको ऐसे ही एक वीडियो के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
ऐसा ही एक मामला हाल ही में मध्य प्रदेश से सामने आया है। यहां पुलिस ने अभी कुछ दिन पहले ही पूरे राज्य में नशा मुक्ति अभियान चलाया था ताकि लोग नशे से दूर रहकर समाज सुधार की ओर कदम बढ़ा सकें। लेकिन इसी बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने पुलिस की छवि पर सवाल खड़े कर दिए।
जाम छलकाते दिखे सब-इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल
इस वायरल वीडियो में दो पुलिसकर्मी शराब पीते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में दिखता है कि एक सब-इंस्पेक्टर और एक हेड कांस्टेबल सड़क किनारे एक ठेली के पास बैठे हुए हैं। उनके साथ एक और व्यक्ति भी बैठा है, जो ठेला लगाने वाला ही लगता है। वीडियो में पहले तो पुलिसकर्मी खुद को संभालते हैं और ऐसा दिखाने की कोशिश करते हैं कि वे शराब नहीं पी रहे। लेकिन वीडियो के आखिर में साफ दिखाई देता है कि हेड कांस्टेबल के हाथ में एक गिलास है, जिसमें शराब है। वह बिना झिझक उसे पीते भी दिखाई देता है।
वीडियो पर लोगों ने दिए ऐसे रिएक्शंस
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों में गुस्सा फैल गया। वजह साफ थी कुछ ही दिन पहले पुलिस ने नशा मुक्ति अभियान चलाया था और उसी पुलिस के कर्मचारी खुद शराब पीते हुए कैमरे में कैद हो गए। मामले को गंभीरता से लेते हुए छतरपुर के पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। इस घटना के सामने आने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब नशा मुक्ति अभियान चलाने वाली पुलिस खुद नशे में डूबी मिलेगी तो आम जनता उस अभियान को कैसे गंभीरता से लेगी? समाज को सही दिशा दिखाने वाले अगर खुद गलत उदाहरण पेश करेंगे तो नशा मुक्ति जैसे अभियान का असर बहुत कम हो जाएगा।