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Zara Hatke: वैज्ञानिकों ने 2000 साल पुरानी ममी का किया सीटी स्कैन, जांच में हुआ होश उड़ाने वाला खुलासा

Wed, 25 Feb 2026 07:20 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Zara Hatke: वैज्ञानिकों ने दो प्राचीन मिस्र की ममियों का सीटी स्कैन किया है, जिसके बाद जांच में बेहद हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। सीटी स्कैन के बाद वैज्ञानिक भी हैरान हैं। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है? 
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वैज्ञानिकों ने 2000 साल पुरानी ममी का किया सीटी स्कैन - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Zara Hatke: वैज्ञानिकों ने हाल ही में दो प्राचीन मिस्र की ममियों का सीटी स्कैन किया है। इन ममियों की स्कैनिंग के बाद जो रिपोर्ट आई है, वो बेहद हैरान करने वाली है। इसने विशेषज्ञों के भी होश उड़ा दिए हैं। ममिया की जांच के बाद पता चला है कि प्राचीन काल में भी इंसान वैसी ही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते थे जिस तरह आज। आइए बताते हैं कि नेस-मिन और नेस-होर नाम की इन दो ममियों के सीटी स्कैन के बाद क्या खुलासा हुआ है। 

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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पहली ममी नेस-मिन की स्कैन की गई जिसकी मृत्यु करीब 330 ईसा पूर्व में 40 साल की उम्र के आसपास हुई थी। स्कैन में उसके शरीर के अंदर रीढ़ की हड्डी के टूटने और पसलियों में फ्रैक्चर के सबूत मिले हैं। शोधकर्ताओं ने नेस-मिन के शरीर पर कुछ ऐसे सुराख और निशान पाए हैं, जो प्राकृतिक नहीं लग रहे थे।

इमेजिंग विभाग की प्रमुख समर डेकर मानते हैं कि ये निशान किसी प्राचीन सर्जिकल इंटरवेंशन यानी सर्जरी की कोशिश के हो सकते हैं, दूसरी तरफ नेस-होर ममी की मौत 190 ईसा पूर्व 60 वर्ष की आयु में हुई थी। उसकी दांतों में गंभीर समस्या मिली है। इससे पता चलता है कि हजारों साल पहले भी लोग बुढ़ापे और जोड़ों के दर्द से परेशान थे। 
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कैसे किया गया सीटी स्कैन? 

वैज्ञानिकों ने इन ममियों के रहस्यों को जानने के लिए उन्हें छुआ तक नहीं। जांच के लिए उन्होंने बेहद शक्तिशाली 320-स्लाइस CT स्कैनर का इस्तेमाल किया गया। यह 0.5 मिलीमीटर जितनी महीन और सटीक तस्वीरें ले सकता है। इन ममियों को उनके ताबूतों के निचले हिस्सों से निकाला भी नहीं गया और मशीन ने उनके शरीर का पूरा 3D डिजिटल मॉडल तैयार किया। यह तकनीक बिल्कुल वैसी ही है जैसे किसी जीते-जागते इंसान की अस्पताल में जांच की जाती है। इस वर्चुअल ऑटोप्सी की मदद से वैज्ञानिक अब उन ममियों के कंकाल, उनके अंगों की बनावट और उनके शरीर में मौजूद प्राचीन धातुओं या ताबीजों को बिना किसी नुकसान के देख सकते हैं। 

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क्यों सीटी स्कैन पर खड़े हो रहे सवाल? 

डरहम यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर क्रिस्टीना रिग्स ने कहा कि प्राचीन मिस्र में शवों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया एक पवित्र और गुप्त स्थान थी। उन्होंने कहा कि इसे अनंत काल के लिए गुप्त रखने के उद्देश्य से बनाया गया था। उनके मुताबिक, इन शरीरों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना या स्कैन करना प्राचीन मान्यताओं का अपमान हो सकता है। उनका कहना है कि कोई भी तकनीक पूरी तरह से सम्मानजनक नहीं हो सकती अगर वह उस व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध उसकी निजता का हनन करती है। 

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