अब इस बीच जीवाश्म विज्ञानियों की एक टीम ने जिसमें ज्यादातर कैलिफोर्निया के लोमा लिंडा विश्वविद्यालय से हैं ने 16000 से ज्यादा डायनासोर के पैरों के निशान खोज हैं, जिनमें टायरानोसॉरस रेक्स के भी शामिल हैं। उन्होंने इस खोज का सावधानीपूर्वक दस्तावेजीकरण किया है। उनका अध्ययन छह साल के नियमित क्षेत्र दौरे पर आधारित है, जो सहकर्मी-समीक्षा पत्रिका पीएलओएस वन में प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में खोजे गए यह सबसे ज्यादा डायनासोर के पदचिन्ह हैं। स्पैनिश जीवाश्म विज्ञानी राउल एस्पेरेंटे के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के सह-लेखक रॉबर्टो बियागी ने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां आपके पास (थेरोपोड) पैरों के निशान इतनी बड़ी संख्या में हों। हमारे पास इस विशेष जगह पर ये सभी विश्व रिकॉर्ड हैं।
बोलीविया के टोरो टोरो नेशनल पार्क में मिले फुटप्रिंट्स (पैरों के निशान) से यह भी पता चला है कि यह सिर्फ चलने और भागने के निशान नहीं हैं। इनमें तैरने के निशान, पूंछ घसीटने के निशान और अचानक मुड़ने के निशान भी मिले हैं। इससे पता चलता है कि डायनासोर यहां पानी के पास रहते थे और लगातार कुछ ना कुछ गतिविधियों में लगे रहते थे। वैज्ञानिकों ने कहा कि पानी का स्तर बढ़ने से ठीक पहले उनके पंजे कीचड़ में दब गए और सदियों के कटाव से वह बचे रहे।
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झुंड में घूमते थे
बोलीविया पहले से ही डायनासोर के पैरों के निशानों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार वैज्ञानिकों को एक बड़े क्षेत्र में पैरों के निशान मिले हैं। यहां पर तीन उंगलियों वाले थेरोपॉड डायनासोरों के अलग-अलग साइज के फुटप्रिंट पाए गए हैं। यहां पर कुछ 10 सेंटीमीटर से छोटे और कुछ 30 सेंटीमीटर से भी बड़े हैं, जो झुंड में घूमते थे। यह खोज डायनासोर के जीवन और व्यवहार को समझने के लिए बेहद अहम है।
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क्षुद्रग्रह ने खत्म कर दिया डायनासोर
बर्मिंघम विश्वविद्यालय के जीवाश्म विज्ञानी रिचर्ड बटलर, जो शोध में शामिल नहीं थे, ने करीब 6 करोड़ वर्ष पहले की अवधि का जिक्र करते हुए कहा कि एक क्षुद्रग्रह के कारण सभी डायनासोर और उनके साथ 75 फीसदी जीवित प्रजातियां अचानक खत्म हो गईं।
ऑस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के जीवाश्म विज्ञानी एंथनी रोमिलियो ने कहा कि पैरों के निशान यह बताने के लिए काफी है किं कंकाल क्या नहीं कर सकते? सिर्फ पैरों के निशानों से, शोधकर्ता यह बता सकते हैं कि डायनासोर कब चलते थे या तेज गति से चलते थे, कब रुकते थे या कब मुड़ते थे।
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अनसुलझा रहस्य
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पठार पर डायनासोर झुंड में क्यों आते थे, यह रहस्य हैं। एंथनी रोमिलियो ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि वे सभी एक बड़ी, प्राचीन, मीठे पानी की झील के नियमित आगंतुक थे, जो इसकी विशाल कीचड़दार तटरेखा पर बार-बार आते थे। उन्होंने कहा कि वे किसी चीज़ से भाग रहे थे या बसने के लिए कहीं तलाश कर रहे थे। अभी यह शोध आगे भी जारी रहेगा।