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Viral: इतना टैक्स देने के बाद भी सब कुछ जेब से, ITR भरते ही छिड़ी बहस, इंटरनेट दो हिस्सों में बंटा

Wed, 05 Aug 2026 10:41 AM IST
दीक्षा पाठक फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Post: आईटीआर फाइलिंग के बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट ने टैक्स व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। एक्स पर एक यूजर ने दावा किया कि इस साल उसने अपनी पहली नौकरी के पूरे सालाना CTC से भी ज्यादा टैक्स भरा है। 
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ITR भरते ही फूटा टैक्सपेयर का गुस्सा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का समय आते ही लोग अपनी सालभर की कमाई और टैक्स का हिसाब-किताब करने में जुट जाते हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी पोस्ट वायरल हो रही है, जिसने टैक्स देने के बदले मिलने वाली सुविधाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक्स पर आर्यांश नाम के एक यूजर ने अपनी बात साझा करते हुए लिखा कि इस साल उन्होंने जितना इनकम टैक्स चुकाया है, वह उनकी पहली नौकरी के पूरे सालाना CTC से भी अधिक है। उनकी यह बात देखते ही देखते हजारों लोगों तक पहुंच गई और कमेंट सेक्शन में टैक्स व्यवस्था को लेकर अलग-अलग राय सामने आने लगी।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट
आर्यांश ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि आखिर एक आम टैक्सपेयर को इतने बड़े टैक्स के बदले मिलता क्या है। उन्होंने लिखा कि अपने ही भविष्य निधि (PF) का पैसा निकालने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। सरकारी स्कूलों की स्थिति पर भरोसा नहीं होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई के लिए निजी स्कूलों का सहारा लेना पड़ता है। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो बीमारी की स्थिति में सरकारी अस्पतालों के बजाय महंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराना मजबूरी बन जाता है।

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घर की ये चीजें लेनी भी हैं जरूरी
उन्होंने आगे लिखा कि टैक्स चुकाने के बावजूद अच्छी सड़कों पर सफर करने के लिए अलग से टोल टैक्स देना पड़ता है। बढ़ते प्रदूषण के कारण घर में एयर प्यूरीफायर लगाना पड़ता है, जबकि साफ पीने के पानी के लिए वॉटर प्यूरीफायर खरीदना भी जरूरी हो जाता है। उनका कहना था कि इन सभी खर्चों के बीच यह सवाल लगातार मन में उठता है कि आखिर टैक्स भरने वाले नागरिक को बदले में कौन-सी ऐसी सुविधा या सम्मान मिल रहा है, जो उसके योगदान को दर्शाए।

दो हिस्सों में बंटी लोगों की राय
यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय दो हिस्सों में बंटती नजर आई। कई यूजर्स ने आर्यांश की बात का समर्थन करते हुए कहा कि टैक्सपेयर्स किसी विशेष सुविधा या वीआईपी व्यवहार की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी केवल यही अपेक्षा है कि जिन बुनियादी सेवाओं के लिए वे टैक्स देते हैं, वे प्रभावी और बेहतर तरीके से उपलब्ध हों। हालांकि, कुछ लोगों ने इस सोच से असहमति भी जताई। उनका कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हुआ है। 

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