नासा की इस फोटो को देख दुनिया हुई हैरान
- फोटो : NASA
Tristan da Cunha: दुनिया रहस्यों से भरी हुई है। वैज्ञानिक अक्सर नई-नई खोज करते हैं। इनमें कई बेहद हैरान करने वाली होती हैं। अब इस बीच अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने हाल ही में कुछ तस्वीरें जारी की हैं। यह एक ऐसा द्वीप है, जिसने दुनिया का ध्यान एक बार फिर अपनी तरफ खींचा है। यह द्वीप दुनिया का हिस्सा तो हैं, लेकिन इसकी अपनी एक अलग दुनिया है। इस द्वीप का नाम ट्रिस्टन दा कुन्हा (Tristan da Cunha) है। दरअसल, यह एक द्वीप समूह है और दुनिया का सबसे दूरस्थ आइसलैंड है। समंदर में फैले विशाल शैवाल (Kelp) के जंगल से ट्रिस्टन दा कुन्हा द्वीप चारों तरफ से घिरा हुआ है।
दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जहां पर तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है। इन इलाकों में जीवन गुजारना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन चुनौतियों के बाद भी मानव की इच्छाशक्ति और जिजीविषा उसे इन हालात का मुकाबला करने लायक बनाकर रखती है।
द्वीप की आबादी में गिरावट
दुनिया के सभी इलाके विपरीत मौसमी परिस्थितियों को झेलते हैं, लेकिन इनमें एक समानता दिखाई देती है। इन इलाकों में आबादी बेहद कम है। डेनमार्क की आबादी 60 लाख से भी कम है। ग्रीनलैंड एक बड़ा देश है, लेकिन आबादी सिर्फ 56 हजार है। इसके अलावा अलास्का में करीब साढ़े सात लाख रहते हैं और साइबेरिया में साढ़े तीन करोड़ लोग रहते हैं। एकाकी द्वीप ट्रिस्टन दा कुन्हा की आबादी सिर्फ 234 रह गई है। यहां के सभी निवासी ब्रिटिश ओवरसीज टेरिटरीज के नागरिक हैं।
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ट्रिस्टन दा कुन्हा के सबसे समीप त्रिनिदाद और टोबैगो के द्वीप सेंट हेलेना इससे 2437 किलोमीटर हैं। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितना अकेला है। दक्षिण अफ्रीका का केप टाउन से इसकी दूरी 2787 किलोमीटर है। इस द्वीप पर पहुंचने के लिए कोई हवाई संपर्क नहीं है। सिर्फ नाव के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका से ट्रिस्टन दा कुन्हा द्वीप पर पहुंचने में छह दिन लगते हैं। यह एक दक्षिण अटलांटिक महासागर में ज्वालामुखी द्वीपों का समूह है। यह करीब 98 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस द्वीप समूह में शामिल गॉफ द्वीप पर एक मौसम केंद्र है। इसके अलावा कहीं अधिक दुर्गम नाइटिंगेल द्वीप सहित इस समूह के अन्य छोटे द्वीप निर्जन हैं।
द्वीप को किसने खोजा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सन 1506 में पुर्तगाली अन्वेषक ट्रिस्टाओ दा कुन्हा ने ट्रिस्टान द्वीपों को सबसे पहले देखा था, लेकिन वह समुद्र की खराब स्थितियों की वजह से द्वीप पर नहीं पहुंच पाए। लेकिन उन्होंने प्रमुख द्वीप का नामकरण अपने नाम पर इल्हा डी ट्रिस्टाओ दा कुन्हा किया। बाद में इसका नाम ट्रिस्टन दा कुन्हा कर दिया गया। 19वीं शताब्दी के शुरुआती समय में ब्रिटेन के सैनिक और आम नागरिक इस द्वीप पर पहुंचे थे और वह यहीं बस गए। इस तरह यह निर्जन द्वीप आबाद हो गया।
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कैसे करते हैं जीवन यापन
ट्रिस्टन दा कुन्हा द्वीप पर के निवासी अपना जीवन यापन मछली के व्यवसाय से करते हैं। इसके अलावा इस द्वीप पर टूरिस्ट भी आते हैं। इससे यहां के लोगों को आय होती है। इस द्वीप समूह का अपना संविधान भी है। यह दुनिया से कई तरह से अलग है। यहां का पारिस्थितिक तंत्र समुद्र पर आश्रित है।