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सिर्फ पृथ्वी नहीं इन ग्रहों पर भी हैं विशालकाय ज्वालामुखी, कर देते हैं वैज्ञानिकों को हैरान

Thu, 10 Dec 2020 10:51 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सौरमंडल के ग्रह (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
ऐसा माना जाता है कि धरती पर जो मजबूत जमीन बनी है, वो ज्वालामुखी से निकले गर्म लावा के सतह पर गिरने और उनके जम जाने की वजह से बनी है। ज्वालामुखियों की वजह से कई द्वीप भी बने हैं। वैसे तो पृथ्वी पर कई ज्वालामुखी हैं, जिनमें कुछ सक्रिय तो कुछ निष्क्रिय हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्वालामुखी सिर्फ पृथ्वी ही नहीं बल्कि सौरमंडल के दूसरे ग्रहों-उपग्रहों पर भी मौजूद हैं। हालांकि उनमें बहुत सारे ऐसे हैं, जो निष्क्रिय हैं और उनमें लाखों सालों से विस्फोट नहीं हुआ है और आगे भी कभी होने की संभावना कम ही नजर आती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सूर्य के सबसे नजदीक बुध ग्रह है। इसकी सतह पर कई चट्टानें और गड्ढे हैं, जिनको लेकर ऐसा माना जाता है कि उनका निर्माण ज्वालामुखी की वजह से हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ग्रह पर कभी बहुत सारे ज्वालामुखी थे, लेकिन बाद में सब निष्क्रिय हो गए और फिर वो कभी सक्रिय हुए ही नहीं। 
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शुक्र ग्रह की सतह (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
शुक्र ग्रह को सौरमंडल के सबसे रहस्यमय ग्रहों में से एक माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी सतह को ऊपर से सीधे देख पाना असंभव है। दरअसल, इसका आसमान घने बादलों से घिरा है और वो बादल कभी टूटते ही नहीं हैं। ऐसा माना जाता है कि इस ग्रह पर कई ज्वालामुखी हैं, जिनमें कुछ सक्रिय भी हैं। असल में यह एक गर्म ग्रह है और इसकी एक वजह ज्वालामुखियों का सक्रिय होना भी है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मंगल ग्रह के बारे में ऐसा माना जाता है कि अतीत में यहां पानी मौजूद था और शायद किसी तरह का जीवन भी हो, लेकिन अब तक इस बात के पुख्ता प्रमाण नहीं मिल पाए हैं। इस ग्रह पर पहले कभी ज्वालामुखी मौजूद थे, इस बात के प्रमाण वैज्ञानिकों के पास हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, मंगल पर मौजूद ओलंपस मोन्स सौर मंडल का सबसे बड़ा ज्ञात ज्वालामुखी है, जिसकी ऊंचाई करीब 25 किलोमीटर है यानी पृथ्वी के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट एवरेस्ट से भी तीन गुना ऊंचा। हालांकि यह लाखों सालों से निष्क्रिय है और शायद आगे भी यह कभी सक्रिय न हो। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा पर भी कभी ज्वालामुखी मौजूद थे, जो सक्रिय थे। हालांकि अब नहीं हैं। वैज्ञानिकों के पास इसके पुख्ता सबूत भी हैं। ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा पर पिघले हुए लावा से बना विशाल मैदानी इलाका है, जिसे मारिया कहा जाता है। 
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