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रहस्यों से भरा है भारत का ये गांव, अजीबोगरीब भाषा में बात करते हैं यहां के लोग

Wed, 04 Mar 2020 01:10 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत का रहस्यमय गांव - फोटो : Social media
हमारा देश सदियों से अपने अंदर कई रहस्य समेटे हुए है। यहां एक से एक ऐसी जगहें हैं, जिनके बारे में जानकर दुनिया हैरान रह जाती है। एक ऐसी ही जगह हिमाचल प्रदेश में भी है। यहां का एक गांव अपने आप में बेहद ही रहस्यमय है। यहां के लोग एक ऐसी भाषा में बात करते हैं, जो यहां के लोगों के अलावा किसी को भी समझ में नहीं आती। 

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मलाणा गांव, हिमाचल प्रदेश - फोटो : Social media
इस गांव का नाम है मलाणा। हिमालय की चोटियों के बीच स्थित मलाणा गांव चारों तरफ से गहरी खाइयों और बर्फीले पहाड़ों से घिरा है। करीब 1700 लोगों की आबादी वाला ये गांव सैलानियों के बीच खूब मशहूर है। दुनियाभर से लोग यहां घूमने के लिए आते हैं। 

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मलाणा गांव, हिमाचल प्रदेश - फोटो : Social media
हालांकि मलाणा तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल है। इस गांव के लिए कोई भी सड़क नहीं है, जिससे लोग आ-जा सकें। पहाड़ी पगडंडियों से होते हुए ही यहां तक पहुंचा जा सकता है। पार्वती घाटी की तलहटी में स्थित जरी गांव से यहां तक सीधी चढ़ाई है। जरी से मलाणा तक पहुंचने में करीब चार घंटे लग जाते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
इस गांव से जुड़े कई एतिहासिक किस्से हैं, रहस्य हैं और कई अनसुलझे सवाल हैं, जिसमें से एक ये है कि यहां के लोग खुद को यूनान के मशहूर राजा सिकंदर महान का वंशज बताते हैं। कहते हैं कि जब सिकंदर ने हिंदुस्तान पर हमला किया था, तो उसके कुछ सैनिकों ने मलाणा गांव में ही पनाह ली थी और फिर वो यही के होकर रह गए। यहां के बाशिंदे सिकंदर के उन्हीं सैनिकों के वंशज कहलाते हैं। हालांकि यह अभी तक पूरी तरह से साबित नहीं हुआ है। सिकंदर के समय की कई चीजें मलाणा गांव में मिली हैं। कहा जाता है कि सिकंदर के जमाने की एक तलवार भी इसी गांव के मंदिर में रखी हुई है। 
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मलाणा गांव, हिमाचल प्रदेश - फोटो : Social media
यहां के लोग कनाशी नाम की भाषा बोलते हैं, जो बेहद ही रहस्यमय है। वो इसे एक पवित्र जबान मानते हैं। इसकी खास बात ये है कि ये भाषा मलाणा के अलावा दुनिया में कहीं और नहीं बोली जाती। इस भाषा को बाहरी लोगों को नहीं सिखाया जाता है। इसको लेकर कई देशों में शोध हो रहे हैं। 
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मलाणा गांव के जमलू देवता - फोटो : Social media
मलाणा के लोग जमलू देवता की पूजा करते हैं और उन्हें ही अपना सबकुछ मानते हैं। दरअसल, इनके जमलू देवता को हिंदू पुराणों में जमदग्नि ऋषि के नाम से जाना जाता है। यहां के लोग मानते हैं कि जमलू देवता को भगवान शिव ने भेजा था। इस गांव में दो मंदिर हैं, जिसमें से एक जमलू देवता का है और दूसरा उनकी पत्नी रेणुका देवी का। 
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मलाणा गांव में जमलू देवता का मंदिर - फोटो : Social media
जमलू देवता के मंदिर की एक दीवार पर हड्डियां, खोपड़ियां और बलि चढ़ाए गए दूसरे जानवरों के अंग लटकाए गए हैं। साथ ही मंदिर की एक दीवार पर चेतावनी भी लिखी हुई है, जिसके मुताबिक अगर कोई बाहरी व्यक्ति इस मंदिर को छूता है, तो उसे 3500 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। 

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मलाणा गांव, हिमाचल प्रदेश - फोटो : Social media
मलाणा के बुजुर्ग बाहरी लोगों से हाथ मिलाने और उन्हें छूने से भी परहेज करते हैं। अगर आप यहां की दुकान से कुछ सामान खरीदें, तो दुकानदार आपके हाथ में देने के बजाए वही पर रख देगा और साथ ही वो पैसे भी अपने हाथ में लेने के बजाए उसे रख देने को कहता है। हालांकि यहां की नई पीढ़ी इन सब बातों को नहीं मानती। उन्हें किसी बाहरी व्यक्ति से बात करने, हाथ मिलाने या गले मिलने से कोई परहेज नहीं है। 

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मलाणा गांव, हिमाचल प्रदेश - फोटो : Social media
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस गांव के लोग शादियां भी अपने गांव के भीतर ही करते हैं। अगर कोई गांव से बाहर शादी करता है, तो उसे समाज से बेदखल कर दिया जाता है। हालांकि ऐसा मामला शायद ही कभी सुनने को मिला हो। 
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मलाणा गांव, हिमाचल प्रदेश - फोटो : Social media
यहां की हशीश (चरस) भी काफी मशहूर है। दरअसल, चरस भांग के पौधे से तैयार किया गया एक मादक पदार्थ है। इसकी सबसे बड़ी खूबी ये है कि मलाणा के लोग इसे हाथों से रगड़ कर तैयार करते हैं और फिर बाहरी लोगों की बेचते हैं। हालांकि इसका प्रभाव गांव के बच्चों पर भी पड़ा है। बहुत कम उम्र में ही यहां के बच्चे ड्रग बेचने के धंधे में उतर जाते हैं। यही वजह है कि मलाणा में बाहरी लोगों को सिर्फ दिन में ही आने की अनुमति है, क्योंकि यहां के सारे गेस्टहाउस रात में बंद हो जाते हैं। यहां के लोगों का मानना है कि जमलू देवता ने ऐसा आदेश दिया है। 
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