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धरती की वो रहस्यमय जगह, जहां 60 करोड़ साल पहले रहते थे अजीबोगरीब जीव

Mon, 03 Feb 2020 10:57 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मिसटेकेन प्वाइंट, न्यूफाउंडलैंड - फोटो : Social media
कनाडा के सूबे न्यूफाउंडलैंड के दक्षिणी-पूर्वी किनारे पर ऊबड़-खाबड़ चट्टानों वाला एक इलाका है। इसे मिसटेकेन प्वाइंट कहते हैं, क्योंकि इस जगह को बहुत से जहाजों ने गलती से वो समझा, जो वो नहीं था और इन चट्टानों से टकरा कर डूब गए। अब न्यूफाउंडलैंड की ये जगह एक और बहस के केंद्र में है। सवाल ये है कि हमारी धरती पर पेचीदा जीवों की उत्पत्ति कब और कैसे हुई थी? 
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मिसटेकेन प्वाइंट, न्यूफाउंडलैंड - फोटो : Social media
इस समुद्र तट पर टहलते हुए फ्रैंकी डुन कहते हैं कि अगर आप इन चट्टानों के आस-पास टहलते हैं, तो आप देखेंगे कि इन की सतह पर हजारों जीवाश्म मौजूद हैं। फ्रैंकी डुन, ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में जीवाश्म वैज्ञानिक हैं। चट्टानों पर जमा ये जीवाश्म आज से करीब 57 करोड़ साल पुराने हैं। उसे धरती का एडिकरन कल्प कहा जाता है। ये जीव उस दौर में हो रहे ज्वालामुखी विस्फोट में जल कर भस्म हो गए थे और इन चट्टानों पर जीवाश्म के तौर पर दर्ज हो गए। आज ये उस दौर के कुदरती दस्तावेज के तौर पर दर्ज हैं। 
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तबाह हुए पॉम्पेई शहर के लोगों के जीवाश्म - फोटो : Social media
फ्रैंकी डुन कहते हैं कि इन चट्टानों के बीच चलते हुए आपको पॉम्पेई शहर में होने का अहसास होता है। इटली का पॉम्पेई शहर ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से भस्म हो गया था। लावा ने इतनी तेजी से शहर पर धावा बोला था कि लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिला था। जो जहां था, वहीं भस्मीभूत हो गया था। आज भी इस शहर में लोगों के जीवाश्म वैसी हालत में मिलते हैं, जिस हाल में लावे ने उन्हें लील लिया था। 

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मिसटेकेन प्वाइंट, न्यूफाउंडलैंड - फोटो : Social media
न्यूफाउंडलैंड के तट पर मिलने वाले एडिकरन कल्प के जीवाश्म हमारी धरती के इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। इन जीवों से पहले के करीब चार अरब वर्षों तक समंदर में केवल एक कोशिका वाले जीव ही आबाद थे। एडिकरन कल्प में अचानक बहुकोशिकीय जीवों का उद्भव धरती पर हुआ था और ये बड़े विचित्र किस्म के जीव थे। आज इनके जैसा कोई जीव धरती पर नहीं दिखता। इनका आकार अजब तरह का है। कोई छोटी पत्तियों जैसे दिखते थे। कोई झाड़ी जैसे, तो कोई पत्ता गोभी के आकार का था। किसी की सूरत तकिए जैसी तो किसी की ऐसी की बताई ही न जा सके। 
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मिसटेकेन प्वाइंट, न्यूफाउंडलैंड में सतह पर चिपके जीवाश्म - फोटो : Social media
अमेरिका की वांडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के जीवाश्म वैज्ञानिक साइमन डैरोच कहते हैं, 'एडिकरन कल्प के ज्यादातर जीव केंचुओं या किसी अन्य चिपचिपे जीव जैसे थे। उस वक्त तक जीवों में कंकाल विकसित नहीं हुआ था।' इन जीवाश्मों के चलते, धरती पर जीवन के विकास की पहेली सुलझी भी है, तो उलझी भी है। साइमन डैरोच कहते हैं कि, 'एडिकरन कल्प के जीव आज से एकदम अलग थे।'
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एडिकरन कल्प के जीव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये जीव आज से करीब साठ करोड़ साल पहले धरती पर आबाद थे और कैम्ब्रियन महायुग से पहले विलुप्त हो गए थे। कैम्ब्रियन महायुग के दौरान ऐसे जीवों की उत्पत्ति हुई, जिनके शरीर के अलग-अलग अंगों के जीवाश्म मिले हैं। मतलब, उस दौर में ज्यादा पेचीदा बनावट वाले जीव विकसित होने लगे थे। आज बड़ा सवाल ये है कि एडिकरन युग के ये अजीब जीव विलुप्त कैसे हो गए? क्योंकि एक दौर ऐसा था, जब ये जीव रूस से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक और नामीबिया से लेकर चीन तक पाए जाते थे। इन जीवों के जीवाश्म इनकी उत्पत्ति के करीब तीस करोड़ साल बाद की चट्टानों से लापता हैं। 
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नामीबिया - फोटो : Social media
एडिकरन और कैम्ब्रियन जीवों के बीच धरती पर क्या हुआ, इसका पता हमें अफ्रीकी देश नामीबिया से मिल सकता है। दक्षिणी नामीबिया में एक जगह है, जहां के जीवाश्मों को वैज्ञानिकों ने 'नामा समूह' का नाम दिया है। आज से करीब 56 करोड़ साल पहले धरती पर बर्फ का महायुग खत्म हो रहा था। समंदरों का विस्तार हो रहा था। तब नामीबिया के इस इलाके में भी उथला समुद्र था। उस समंदर में रहने वाले जीवों के जीवाश्म यहां आज भी पाए जाते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि ये जगह, धरती के एडिकरन कल्प से कैम्ब्रियन कल्प में प्रवेश करने की गवाही देती है। ये धरती के जैविक इतिहास का सब से ज्यादा उठा-पटक वाला दौर कहा जाता है।  

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एडिकरन कल्प के जीव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
साइमन डरोच को नामीबिया में 2013 में कुछ ऐसे जीवाश्म मिले थे जो बिलों में रहा करते थे। इसका मतलब ये हुआ कि कुछ ऐसे जीव विकसित हो चुके थे, जो समंदर की तलहटी में अपने लिए चारा तलाशते थे। इनके मुकाबले एडिकरन कल्प के जीव बहुत साधारण थे। वो ज्यादा चलते फिरते नहीं थे और अपनी रिहाइश के आस-पास ही चारा तलाशते थे, लेकिन नामीबिया से मिले जीवाश्म बताते हैं कि करीब 54 करोड़ साल पहले जीवों के दूर तक खाना तलाशने जाने और बिल बना कर रहने के संकेत मिलने लगे थे। 

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एडिकरन कल्प के जीवाश्म - फोटो : Social media
साइमन डरोच कहते हैं कि इन नए जीवों की उत्पत्ति के बाद ही एडिकरन कल्प के जीवों के लिए संकट खड़ा हुआ होगा और वो मुकाबला न कर पाने की वजह से खत्म हो गए। वैसे, कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि एडिकरन दौर के जीवों के खात्मे की ये वजह नहीं है, क्योंकि धरती पर अलग दौर में उत्पन्न हुए जीव करोड़ों बरस तक साथ रहे थे। इसके पक्के सुबूत मिलते हैं। स्कॉटलैंड की एडिनबरा यूनिवर्सिटी की रैशेल वुड कहती हैं कि, 'ये जीव समंदर के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे थे। ऐसे में इन का आपस में सामना भी नहीं हुआ होगा।' 

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न्यूफाउंडलैंड, कनाडा - फोटो : Social media
कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि एडिकरन युग के ये जीव तब विलुप्त हुए, जब समुद्र के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम हो गई। अमेरिका की वर्जिनिया टेक यूनिवर्सिटी के जीवाश्म वैज्ञानिक चिआओ शुहाई कहते हैं कि, 'हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि एक दौर में समुद्र के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम हो गई थी।' जब ये कम ऑक्सीजन वाला पानी उथले समुद्री इलाकों में फैला, तो इसकी मार उन जीवों पर पड़ी, जो इन उथले इलाकों में आबाद थे। एडिकरन युग के जीव भी इनमें शामिल थे। चूंकि वो जीव ज्यादा चल फिर नहीं सकते थे, तो उन के बचने का ये रास्ता भी बंद था। वो दूसरी जगह बच कर जा नहीं सके और बदले हुए हालात का सामना न कर पाने की वजह से विलुप्त हो गए। 
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कैम्ब्रियन युग के जीव - फोटो : Social media
एडिकरन जीवों के विनाश की जो भी वजह रही हो, लेकिन उन के विलुप्त होने से कैम्ब्रियन जीवों का धरती पर आगाज हुआ। आज जितने भी जीव धरती पर पाए जाते हैं, उन सभी के पुरखों का ताल्लुक किसी न किसी तौर पर कैम्ब्रियन युग के जीवों से पाया जाता है। 
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