हालांकि, बीजिंग कुछ भी नहीं कह रहा है, लेकिन इस बात को लेकर पर्याप्त वजहें हैं कि क्यों चीन शायद इस छह साल के बच्चे को गायब करना चाहता होगा। तिब्बती बौद्धवाद में पंचेन लामा का नंबर दलाई लामा के ठीक बाद आता है। दलाई लामा ने 1959 में तिब्बत छोड़ दिया था। इसके साथ ही वह तिब्बतियों की शक्ति के एक वैकल्पिक स्रोत बन गए। तिब्बती लंबे वक्त से इस हिमालयी इलाके पर चीन के कब्जे का विरोध कर रहे हैं।
इस बात के तर्क दिए जाते हैं कि चीन नहीं चाहता था कि पंचेन लामा भी वैसी ही सत्ता हासिल करें और तिब्बत के प्रशासन के लिए एक अवरोध बनकर उभरें। गेधुन चोएक्यी नियिमा के गायब होने के बाद चीन ने अपना पंचेन लामा चुन लिया है। कई लोगों का मानना है कि मौजूदा दलाई लामा के मरने के बाद चीन अपना दलाई लामा भी चुन लेगा।
चीन के बदलते तर्क
गुजरे सालों में चीन की सरकार ने गुम हुए पंचेन लामा के बारे में कुछ जानकारियां मुहैया कराई हैं, हालांकि इसमें कोशिश यही रही है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है। उनके गायब होने के तुरंत बाद ही चीन ने यूएन वर्किंग ग्रुप को बताया, अवतारी बच्चे के परिवार के गायब होने या उनके अपहरण का कभी कोई मामला नहीं रहा।'
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चीन का कहना था कि ये दावे दलाई लामा समूह के मनगढ़ंत सपने हैं। अगले साल यानी 1996 में यह कहानी बदल गई। चीन ने कहा कि कुछ 'बेशर्म लोगों' ने बच्चे को विदेश भेजने की कोशिश की थी और ऐसे में उनके पेरेंट्स ने सुरक्षा की मांग की, जो कि उन्हें मुहैया कराई गई है। सुरक्षा के बावजूद बीजिंग के मुताबिक, बच्चा और उनका परिवार एक सामान्य जिंदगी जी रहे हैं और वे नहीं चाहते कि कोई उन्हें तंग करे। बीजिंग तब से अक्सर इस बात को दोहराता रहता है।
कभी-कभार चीनी सरकार जिस तरह की तस्वीर पेश करती है उससे साफ पता चलता है कि उसके यहां सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। 1998 में चीन ने वर्किंग ग्रुप को बताया कि पंचेन लामा की मां एक जेल में एक सजायाफ्ता कैदी हैं। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि वह किस वजह से और कब से कैद में हैं। कई बार खबर के दूसरे जरिये होते हैं।
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साल 2000 में उस वक्त के ब्रिटेन के विदेश मंत्री रॉबिन कुक ने कहा था कि चीन ने यूके के अधिकारियों को एक ऐसे बच्चे के दो फोटोग्राफ दिखाए हैं जिसे वह गायब हुए पंचेन लामा बता रहा है। एक तस्वीर में एक बच्चा टेबिल टेनिस खेल रहा है। दूसरी फोटो में बच्चा एक ब्लैकबोर्ड पर चीनी अक्षर लिख रहा है। ब्रिटिश अधिकारियों को ये तस्वीरें केवल दिखाई गई थीं, उन्हें लेने की इजाजत नहीं दी गई।
एक अन्य वाकये में तिब्बती अधिकारियों ने मुझे 2007 में तिब्बत की एक रिपोर्टिंग ट्रिप के दौरान बताया था कि गायब हुए पंचेन लामा शांति के साथ जीना चाहते हैं और वह नहीं चाहते कि कोई उन्हें तंग करे। भारत के धर्मशाला में तिब्बत की निर्वासित सरकार के मुताबिक, उनके बारे में अंतिम पुख्ता खबर दो साल पहले तब आई जब चीन ने यूएन को बताया कि पंचेन लामा एक सामान्य जिंदगी जी रहे हैं और वह नौकरी करते हैं। चीन की सरकार ने इस आर्टिकल में इस जानकारी पर अपनी तरफ से कोई अपडेट देने से इनकार कर दिया।
2008-14 के दौरान यूएन वर्किंग ग्रुप में काम कर चुके प्रोफेसर जेरेमी सारकिन कहते हैं कि चीन ने साफतौर पर यूएन मानवाधिकार नियमों का उल्लंघन करते हुए पंचेन लामा को गायब कर दिया था। उन्होंने कहा, 'चीन की कही गई बातें हकीकत को नकार नहीं सकतीं। वे उन्हें और उनके परिवार को ले गए थे। हमें इस बात की इजाजत मिलनी चाहिए कि हम जांच कर सकें कि वे सही-सलामत हैं।'
फिलहाल लिस्बन की नोवा यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे प्रोफेसर सारकिन कहते हैं कि चीन खुलेआम इस बात को बताने से बच रहा है कि उसने कुछ गलत किया है। वह कहते हैं, 'कोई सरकार नहीं मानेगी वे लोगों को गायब करते हैं।'
निर्वासन में रह रही सरकार
तिब्बत मामलों पर लंबे वक्त से नजर बनाए हुए रॉबर्ट बार्नेट कहते हैं कि चीन की तिब्बत में कड़ी नीतियों को इसके ज्यादातर नागरिकों का समर्थन हासिल है। फिलहाल लंदन के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज में विशेषज्ञ बार्नेट कहते हैं, चीन तिब्बियों को साथ लाने में कामयाब नहीं हुआ है, लेकिन अगर आपकी 1.4 अरब चीनी लोगों की आबादी आपको सही मानती है तो इस बात के कोई मायने नहीं रह जाते हैं।'
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लेकिन, वह कहते हैं कि चीन के नेता कभी भी चैन से तिब्बत में सत्ता का मजा नहीं उठा पाएंगे। हालांकि, तिब्बत की निर्वासन में रह रही सरकार भी कुछ कर पाने की हैसियत में नहीं है। दो साल पहले दलाई लामा ने कहा था कि उनके पास इस बात की पक्की जानकारी है कि वह अब भी जिंदा हैं, लेकिन इसके बाद कुछ और जानकारी नहीं आई।
तिब्बत की लंदन में निर्वासित सरकार के प्रतिनिधि सोनम त्सेरिंग फ्रासी कहते हैं कि काश वे छह साल के बच्चे की फोटो को हाथ में पकड़े रहने से ज्यादा कुछ और भी कर पाते। फ्रासी कहते हैं कि यह तस्वीर चीन के बाहर तिब्बतियों की मॉनेस्ट्रीज और घरों में टंगी है। हमें उम्मीद है कि एक दिन हम उन्हें देख पाएंगे कि बड़े होकर अब वे कैसे दिखते हैं।