क्या होता है ओजोन प्रदूषण?
तीन ऑक्सीजन अणुओं से बनने वाली ओजोन एक गैस है। ऊंचे आसमान में यहसूरज की हानिकारक किरणों से बचाती है, लेकिन जमीन के पास यह प्रदूषण बन जाता है। किसी स्रोत से यह सीधे नहीं निकलता है, बल्कि वाहनों, उद्योगों और बिजलीघरों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के सूरज की रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है। यह बहुत प्रतिक्रियाशील गैस होती है, जो हवा में लंबी दूरी तक फैल सकती है। इससे यह शहरों से लेकर गांवों तक को प्रभावित करती है।
कई शहरों में ओजोन का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मार्च-मई में कई शहरों में ओजोन का स्तर बेहद खतरनाक हो गया था। दिल्ली की रिपोर्ट पहले ही जारी की जा चुकी है। इसकी वजह से इस अध्ययन में उसे शामिल नहीं किया गया।
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बेंगलुरु में गर्मी के दौरान 92 दिनों में से 45 दिन ओजोन का स्तर मानक से अधिक रहा। यह बीते साल की तुलना में 29 फीसदी बढ़ा है। होमबेगोड़ा नगर सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रहा। मुंबई की बात करें, तो 32 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो साल 2024 की तुलना में 42 फीसदी कम है। चकाला सबसे प्रभावित इलाका रहा। कोलकातामें 22 दिन ओजोन स्तर बढ़ा। यहां भी बीते साल की तुलना में 45 प्रतिशत कम है। रवींद्र सरोवर और जादवपुर हॉटस्पॉट थे। हैदराबाद में 20 दिन ओजोन स्तर बढ़ा। यह बीते साल की तुलना में 55 फीसदी कम है। बोल्लारम सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जबकि चेन्नई में 15 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो बीते साल शून्य था। यहां आलंदुर सबसे प्रभावित क्षेत्र र। इन शहरों में ओजोन का स्तर सर्दियों और अन्य मौसमों में भी बढ़ रहा है, खासकर गर्म जलवायु वाले इलाकों में।
हर शहर में कुछ खास इलाकों में ओजोन का स्तर सबसे अधिक बढ़ता है। यहां पर प्रदूषण का असर और गंभीर होता है। ओजोन से सांस की नली को नुकसान पहुंचता है। अस्थमा और दमा जैसी बीमारियों को बढ़ाता है। इससे फसलों को भी नुकसान पहुंचता है।
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ओजोन प्रदूषण की वजह
ओजोन में वृद्धि मौसम और प्रदूषण स्रोतों पर निर्भर होती है। गर्मी और सूरज की रोशनी इसकी रासायनिक प्रतिक्रिया को बढ़ाती है। वाहन, उद्योग, कचरा जलाना और ठोस ईंधन का इस्तेमाल इसकी वजहे हैं। .