रेडिट पर हाल ही में एक खास कहानी खूब वायरल हो रही है। इस कहानी में एक आदमी ने अपने तलाक का केस बिना किसी वकील की मदद से खुद लड़ा और आखिर में बिना कोई पैसा दिए तलाक भी ले लिया। इस जीत की खुशी में उसने एक पार्टी की और केक काटा, जिस पर लिखा था, "Happily Divorced With 0 Alimony Maintenance" यानी “खुशी-खुशी तलाक हुआ, बिना कोई भरण-पोषण राशि दिए।” तो आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह घटना
यह कहानी रेडिट फोरम पर एक यूजर ने शेयर की थी। पोस्ट के मुताबिक उस आदमी की पत्नी ने उसके खिलाफ तीन बड़े केस दर्ज कराए थे। इनमें दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण जैसे कानून शामिल थे। लेकिन उस आदमी ने न कोई वकील रखा और न ही डर दिखाया। वह खुद कोर्ट गया, अपने केस की तैयारी की और दोनों ही मामलों घरेलू हिंसा और भरण-पोषण को खारिज करवाने में सफल रहा। शुरुआत में पत्नी ने 70 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में यह घटकर 30 लाख हो गई। लेकिन आदमी ने कहा कि वह सिर्फ 1 लाख रुपये ही देगा, वह भी अपनी शर्तों पर। आखिर में पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए हामी भर दी और कोई भी एलिमनी नहीं ली।
आदमी ने तलाक को किया सेलिब्रेट
इस जीत के बाद उस आदमी ने अपने दोस्तों के साथ सेलिब्रेशन किया। उसने एक केक बनवाया, जिसमें साफ-साफ लिखा था कि उसने बिना एलिमनी दिए तलाक लिया है। इस पोस्ट पर रेडिट यूजर्स की प्रतिक्रियाएं बहुत तेजी से आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे “सिस्टम में पुरुषों के साथ हो रहे पक्षपात” के खिलाफ बड़ी जीत कहा। पोस्ट में आदमी ने यह भी लिखा कि अब कई लोग उससे संपर्क कर रहे हैं, सलाह मांग रहे हैं, लेकिन उसने सभी को यही सलाह दी. “किसी मसीहा का इंतजार मत करो, खुद कानून को समझो, एनजीओ से जुड़ो और अपने हक के लिए खुद खड़े हो जाओ।”
लोगों ने इस घटना पर दी ऐसी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर लोगों की राय अलग-अलग थी। कुछ लोगों को यह इंस्पायरिंग लगा और उन्होंने इसे हिम्मत वाली कहानी बताया। लेकिन कुछ लोगों को ये बात अजीब लगी कि कोई व्यक्ति एलिमनी न देने को सेलिब्रेट कर रहा है। एक यूजर ने लिखा, “मेंटेनेंस न देना कोई गर्व की बात नहीं होनी चाहिए।” इस पोस्ट के बाद कई और पुरुषों ने भी अपने-अपने अनुभव शेयर किए। उन्होंने बताया कि कैसे वे झूठे केस में फंसे, वर्षों कोर्ट के चक्कर लगाए और कैसे सिस्टम से लड़ाई लड़ी। देखते ही देखते यह पोस्ट एक सपोर्ट ग्रुप जैसी बन गई, जहां लोग एक-दूसरे को समझ रहे थे और मदद कर रहे थे।