चाय की केतली को ट्रेन धोने वाले पानी से धो रहा है और इसमें एक बार तो कुछ आपत्तिजनक नहीं लगता है। कोई भी कह सकता है कि पानी तो पानी होता है, लेकिन क्या परेशानी है? लेकिन रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को धोने के लिए लगी पाइपों में हमेशा ग्राउंड वॉटर नहीं आता है, बल्कि जल बचाने के लिए रेलवे कई बार रिसाइकिल वाटर का भी इस्तेमाल करता है। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि कैटरिंग वाला किस स्थान पर बर्तन को धो रहा है।
पानी रिसाइकल करने का मतलब होता है कि इस्तेमाल पानी का कुछ हद तक साफ करकें, दोबारा से इस्तेमाल किया जाएं। ऐसे में अगर कोई रेलवे ट्रैक पर लगे डॉयरेक्ट पानी के सप्लाई से खाने-पीने वाले बर्तनों को धोता है, जिसका इस्तेमाल वो आम लोगों के खाने-पीने की चीजों को बनाने में करेगा, तो यह उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं है।
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बताया जा रहा है कि यह वायरल वीडियो बेंगलुरु के यशवंतपुर रेलवे स्टेशन का है। यहां पर एक यात्री ने कैटरिंग वाले के इस कारनामे को कैमरे में कैद कर लिया। उसमें शख्स कुछ कहता नजर आ रहा है। अगर ट्रेन धोने या बोगियों में लगे टैंकों में ताजे पानी की आपूर्ति के लिए लगी सीधी वॉटर स्पलाई को साफ मान भी लिया जाए, तो जिस जगह पर बैठकर बंदा बर्तन को धो रहा है। उसे बिल्कुल भी साफ नहीं कहा जा सकता।
क्योंकि इन जगहों पर लोग ट्रेन खड़ी होने पर थूकने से लेकर तमाम तरह का कचरा फेंक देते हैं। उस स्थान स्वच्छ नहीं कहा जाता है और वहां पर बर्तन धोना अच्छा नहीं है। बर्तन धो रहे शख्स का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @kohlificationn नाम के अकाउंट से इस वीडियो को शेयर किया गया है। कैप्शन लिखा है, सफाई का एक और नाम है: रेल विभाग। देखिए ये लोग केतली को धोने के लिए कैसे पानी इस्तेमाल कर रहे हैं। यशवंतपुर रेलवे स्टेशन से चौंकाने वाली तस्वीरें! कॉफी और चाय के केतली को उसी पाइप के पानी से धोए जा रहे हैं जिसका इस्तेमाल ट्रेनों की सफाई के लिए किया जाता है।
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अगर बर्तन धोने के लिए ऐसा पानी इस्तेमाल किया जाता है, तो सोचिए आपकी चाय/कॉफी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की ‘शुद्धता’ कैसी होगी? यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए इसके खतरों के बारे में सोचना भी घिनौना है। कई लोगों ने रेलवे को टैग करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।