बेहोश बच्ची को अस्पताल ले जाने के लिए भी पैसे जरूरी?
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महाराष्ट्र के बीड़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को नाराज कर दिया है। आरोप है कि स्कूल में दौरा पड़ने के बाद बेहोश हुई 11 साल की बच्ची और उसके पिता को एंबुलेंस से इसलिए उतार दिया गया, क्योंकि वे चालक की मांग के मुताबिक पैसे नहीं दे सके। बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग एंबुलेंस चालक की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों की जांच जरूरी है। तो आइए जानते हैं।
स्कूल में अचानक बेहोश हो गई बच्ची
जानकारी के मुताबिक यह घटना बीड़ जिले के दिंद्रुड गांव में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली 11 साल की बच्ची को स्कूल में अचानक दौरा पड़ा। इसके बाद वह बेहोश हो गई। बच्ची की हालत देखकर स्कूल के शिक्षक उसे तुरंत दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यहां मेडिकल ऑफिसर डॉ. निलेश धाकणे ने बच्ची की हालत को देखते हुए उसे आगे के इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में भेजने की सलाह दी। इसके बाद बच्ची को ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की गई।
किराया नहीं दे पाए तो एंबुलेंस से उतारने का आरोप
आरोप है कि बच्ची को आगे के इलाज के लिए ले जाते समय एंबुलेंस के किराए को लेकर विवाद हो गया। बच्ची के पिता की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। ऐसे में वह चालक की ओर से मांगी गई रकम नहीं दे पाए। आरोप है कि इसके बाद बेहोश बच्ची और उसके पिता को एंबुलेंस से नीचे उतरने के लिए कह दिया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। लोगों का कहना है कि जब कोई बच्चा बेहोशी की हालत में हो और उसे तुरंत इलाज की जरूरत हो, तब पैसे को लेकर ऐसी स्थिति पैदा होना बेहद गंभीर मामला है।
मजदूरी करके चार बच्चों को पालते हैं पिता
बताया जा रहा है कि बच्ची की मां का निधन हो चुका है। उसके पिता मजदूरी करके अपने चार बच्चों का पालन-पोषण करते हैं। परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है। ऐसे में बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद परिवार के सामने इलाज की चिंता के साथ पैसों की परेशानी भी खड़ी हो गई।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन मदद को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें 'माझे गाव, आरोग्य संपन्न गाव' और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम भी शामिल हैं। वीडियो वायरल होने के बाद लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की जांच हो और अगर एंबुलेंस चालक की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर किसी गरीब परिवार के पास आपात स्थिति में पैसे न हों तो क्या उसे समय पर इलाज मिलने में भी परेशानी उठानी पड़ेगी?