कहा तो ये भी जाता है कि ली चिंग ने अपनी जिंदगी के शुरुआती 100 साल तक लिंग्जी, गोजी बेरी, जींसेंग, वू और गोडू कोला जैसी जड़ी-बूटियों को इकट्ठा किया और उन्हें बेचा। उन्होंने अपनी जिंदगी के अगले 40 साल सिर्फ जड़ी बूटियों के सहारे गुजारे। वो कई तरह की जड़ी-बूटियों के साथ-साथ चावल से बनी शराब को भोजन के रूप में लेते थे।