यूरेका सिटी
- फोटो : Social media
शेबा रीफ के पास बसा है यूरेका सिटी। ये सुनहरी खदान यानी गोल्डेन क्वैरी की तलाश के बाद बसाया गया था। एक दौर था कि यहां 700 लोग रहते थे। तब यूरेका सिटी में दुकानें थीं, होटल थे, म्यूजिक हॉल था, लॉन टेनिस के दो कोर्ट थे। यहां एक घुड़सवारी ट्रैक भी था। 1885 में यहां सोने की तलाश में मची भगदड़ यानी गोल्डेन रश के दौर में 28 पब खुले हुए थे। ये सभी 20 किलोमीटर के दायरे में स्थित थे। इनमें शराब के बदले में गिन्नियां दी जाती थीं। लेकिन, 1924 के आते-आते यूरेका शहर वीरान होने लगा था। 1886 में यहां से 360 किलोमीटर दूर सोने का दूसरा खजाना मिलने के बाद इस शहर से लोग उधर कूच कर गए। बाद में ये नया ठिकाना ही आज के जोहानिसबर्ग शहर के तौर पर विकसित हुआ।