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क्या शुक्र ग्रह पर इंसानों का रहना संभव है? हैरान कर देंगे ये रहस्य

Wed, 29 Jan 2020 10:30 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शुक्र ग्रह - फोटो : Pixabay
हमारे सौरमंडल में जितने भी ग्रह हैं, उन सभी में कुछ न कुछ रहस्य छुपे हुए हैं। आज हम आपको शुक्र ग्रह के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सूर्य के सबसे निकटतम ग्रहों में से एक है। यह चंद्रमा के बाद रात के समय आकाश में सबसे अधिक चमकने वाला ग्रह है। इसे दिन के समय भी आसमान में देखा जा सकता है। इस ग्रह को 'पृथ्वी की बहन' भी कहा जाता है। अब सवाल ये है कि क्या पृथ्वी की तरह इस ग्रह पर भी इंसानों का रहना संभव है? तो चलिए इसका रहस्य भी बता ही देते हैं...
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शुक्र ग्रह की सतह - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों के मुताबिक, शुक्र एक केंद्रीय लौह कोर, चट्टानी मैंटल और सिलिकेट क्रस्ट से बना ग्रह है। इसकी सतह पर सल्फ्यूरिक एसिड का भंडार है। इसकी सतह ने सल्फ्यूरिक एसिड को बादल की तरह बिछाया हुआ है। ऐसे में अगर यहां इंसान गया तो पल भर में उसकी हड्डियां तक गल जाएंगी। 
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सौरमंडल के ग्रह - फोटो : Pixabay
शुक्र ग्रह का तापमान आमतौर पर 425 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। दरअसल, शुक्र तीन डिग्री के अपने सीमित अक्षीय झुकाव के कारण किसी भी मौसम का अनुभव नहीं करता, इसीलिए इस ग्रह पर हमेशा अत्यधिक गर्मी ही रहती है। जहां पृथ्वी पर 45-50 डिग्री सेल्सियस तापमान जाते-जाते इंसान की त्वचा जलने लगती है, ऐसे में 425 डिग्री सेल्सियस तापमान में इंसान का क्या हाल होगा, ये आप सोच सकते हैं। 

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शुक्र ग्रह की सतह - फोटो : Pixabay
शुक्र पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी की तुलना में 92 गुना अधिक है। यहां का तीव्र दबाव किसी भी आने वाले अंतरिक्ष यान को अपनी सतह पर लंबे समय तक रहने की अनुमति नहीं देता है। अंतरिक्ष यान इस ग्रह की सतह पर अधिकतम दो घंटे ही रुक सकते हैं। 
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सौरमंडल के ग्रह - फोटो : Pixabay
शुक्र ग्रह का वायुमंडल सदैव गैसों के बने घने बादलों से घिरा रहता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई इंसान इस ग्रह पर चला जाए तो वह इस ग्रह की सतह से सूर्य या पृथ्वी को कभी नहीं देख पाएगा। हालांकि इस ग्रह पर इंसानों का पहुंचना ही आज के समय में सबसे मुश्किल काम है। 
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शुक्र ग्रह की सतह - फोटो : Pixabay
शुक्र ग्रह की सतह पर कोई भी छोटा गड्ढा नहीं है। इसकी वजह है कि इसके वायुमंडल में प्रवेश करने वाले क्षुद्रग्रह या अन्य वस्तुओं को इसकी सतह पर टकराने से पहले ही इसका वायुमंडल का दाब उन्हें नष्ट कर देता है। 
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शुक्र ग्रह (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों साल पहले शुक्र की जलवायु पृथ्वी के समान रही होगी। इस ग्रह पर बड़ी मात्रा में पानी या महासागर रहे होंगे, लेकिन अत्यधिक तापमान और ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण सतह का पानी उबल गया होगा और धीरे-धीरे उसका अस्तित्व ही खत्म हो गया होगा। नासा के मुताबिक, इस ग्रह की सतह पर 20 किलोमीटर से बड़े 1,000 से ज्यादा ज्वालामुखी केंद्र हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश निष्क्रिय हैं। यहां कुछ ही सक्रिय ज्वालामुखी हैं। 
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