हर साल हजारों भारतीय छात्र बेहतर शिक्षा, एक अच्छे करियर और सुनहरे भविष्य की उम्मीद लेकर विदेश का रुख करते हैं। कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी वर्षों की बचत खर्च कर देते हैं, जबकि कई छात्र एजुकेशन लोन लेकर यूरोप और दूसरे देशों की यूनिवर्सिटियों में दाखिला लेते हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट ने विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की जिंदगी का वह पक्ष सामने रखा है, जिसके बारे में अक्सर कम चर्चा होती है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है ये पोस्ट
यूरोप में रहने वाले राहुल महाजन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि विदेश पहुंचने के बाद कई भारतीय छात्रों को पढ़ाई के साथ आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। उनके मुताबिक लाखों रुपये खर्च करने या एजुकेशन लोन लेने के बावजूद छात्रों को रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए ऐसे काम करने पड़ते हैं, जिनकी उन्होंने शायद भारत में कभी कल्पना भी नहीं की होती। पढ़ाई के साथ पार्ट-टाइम नौकरी करना उनके लिए मजबूरी बन जाता है, जिससे दिन का बड़ा हिस्सा कॉलेज और काम के बीच ही बीत जाता है।
स्टूडेंट ने सुनाई आपबीती
राहुल के अनुसार यूरोप के कई देशों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों को सीमित घंटे ही काम करने की अनुमति होती है। आमतौर पर वे सप्ताह में करीब 20 घंटे या महीने में लगभग 80 घंटे तक ही नौकरी कर सकते हैं। ऐसे में होने वाली कमाई किराया, खाने-पीने, कॉलेज फीस और बाकी जरूरी खर्चों के लिए काफी नहीं होती। यही वजह है कि कई छात्र कम वेतन वाली नौकरियां भी करने को मजबूर हो जाते हैं, ताकि किसी तरह अपना खर्च चला सकें। उन्होंने यह भी बताया कि एजुकेशन लोन का दबाव छात्रों की मुश्किलें और बढ़ा देता है। दूसरी ओर भारत में रहने वाले परिवार और रिश्तेदार उनसे बेहतर भविष्य और अच्छी कमाई की उम्मीद लगाए रहते हैं। इन जिम्मेदारियों के बीच छात्रों को पढ़ाई पूरी करनी होती है, नौकरी तलाशनी होती है और आगे चलकर वर्क परमिट या नागरिकता जैसी लंबी प्रक्रियाओं से भी गुजरना पड़ता है।
यूजर्स ने दिए ऐसे रिएक्शन
राहुल की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई यूजर्स ने कहा कि विदेश की जिंदगी जितनी आसान और आकर्षक दिखती है, हकीकत उससे कहीं ज्यादा कठिन होती है। वहीं कुछ लोगों का मानना था कि मेहनत करने में कोई बुराई नहीं है। एक यूजर ने लिखा, "काम छोटा या बड़ा नहीं होता, आज की मेहनत ही कल की सफलता बनती है।" कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भारत में सीमित रोजगार के अवसरों को देखते हुए विदेश जाकर संघर्ष करना कई युवाओं के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं बाकी यूजर्स का कहना था कि लोग विदेश की चमक-दमक और ऊंची कमाई से आकर्षित हो जाते हैं, लेकिन वहां की अकेली जिंदगी, लगातार काम का दबाव और मानसिक चुनौतियों को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।