यह पहली बार नहीं जब पुणे में जन्मीं वेदांगी कुलकर्णी इस तरह की साहसिक कार्य करेंगी। साल 2018 में भी उन्होंने इसी तरह का साहसिक कार्य किया था। भले ही उस दौरान उन्होंने अलग रास्ते से यात्रा की थी और इसे 159 दिनों में पूरा किया। इस यात्रा के बाद वह दुनिया भर में साइकिल चलाने वाली सबसे तेज एशियाई बनी थीं। इस बार उनकी कोशिश मौजूदा विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए 124 दिनों से कम समय में यात्रा करने की है।
वर्तमान समय में वेदांगी कुलकर्णी स्कॉटलैंड के इनवर्नेस में रहती हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में उन्होंने वहीं से पीटीआई को बताया कि पिछली बार की यात्रा से मुझे यह सीखने को मिला है कि ऐसी सवारी को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए क्या करना पड़ता है। उन्होंने इस उपलब्धि को हासिल करने के प्रति आश्वस्त नजर आईं। उन्होंने साल 2023 में कठिन मनाली-लेह मार्ग पर साइकिल चलाने वाली सबसे तेज महिला होने का टैग भी अर्जित किया है।
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पुणे में अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान वेदांगी फुटबॉल समेत कई खेलों में रुचि रखती थीं और बाद में उन्हें साइकिल चलाना पसंद आया। यूनिवर्सिटी ऑफ बोर्नमाउथ में स्नातक की पढ़ाई के दौरान उनके मन में दुनिया भर में साइकिल चलाने का विचार आया। उन्होंने कोरोना महामारी आने से पहले अपने इस कार्य को पूरा किया।
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उनके प्रशिक्षण में नियमित योग करना और ध्यान के अलावा मीलों साइकिल चलाना शामिल है। वेंदागी ने बताया कि उन्हें साइकिल की सवारी के दौरान रिकॉर्ड हासिल करने के लिए हर दिन 300 किमी से अधिक की दूरी तय करनी होगी। वेदांगी फिनलैंड में यात्रा समाप्त करने से पहले फिनलैंड, एस्टोनिया, रूस, मंगोलिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका, कनाडा, पुर्तगाल, स्पेन, फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड, जर्मनी, डेनमार्क और स्वीडन से होकर साइकिल यात्रा करेंगी।
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वेंदागी को अपनी पिछली यात्राओं में चाकू की नोक पर (स्पेन में) लूटने और (कनाडा में) भूरे भालू द्वारा पीछा किए जाने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा। वह कहती हैं कि साइकिल यात्रा चुनौतियों से भरी रहती है, लेकिन हर स्थिति के लिए सही रणनीति बनाना महत्वपूर्ण है। वेदांगी ने कहा, 'बाधाओं से परे देखें' वह संदेश है जिसे वह फैलाना चाहती हैं।