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India Mauritius Relation: वर्षों पुराना है भारत और मॉरिशस का संबंध, जानिए कौन थे गिरमिटिया मजदूर

Tue, 09 Sep 2025 02:21 PM IST
संकल्प सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मॉरीशस के प्रधानमंत्री का भारत दौरा सांस्कृतिक, धार्मिक और कूटनीतिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दौरे में वह वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे।
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India Mauritius Relation - फोटो : ANI
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विस्तार
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मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम 9 सितंबर से लेकर 15 सितंबर तक भारत का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान वह 10 सितंबर को वाराणसी का दौरा भी करेंगे। मॉरीशस के प्रधानमंत्री का भारत दौरा सांस्कृतिक, धार्मिक और कूटनीतिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दौरे में वह वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। कई लोगों को इस बारे में पता नहीं होगा कि मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम उन्हीं गिरमिटिया परिवार से संबंध रखते हैं, जिनके पूर्वजों को कई वर्षों पहले एग्रीमेंट कराकर अंग्रेज भारत से मॉरिशस ले गए थे। गिरमिटिया कनेक्शन की वजह से भारत और मॉरिशस का रिश्ता काफी ऐतिहासिक रहा है। 

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18वीं सदी में भारत में आकाल पड़ा था। आकाल पड़ने की वजह से देश में भुखमरी काफी बढ़ गई थी। इस आकाल में लाखों लोगों की मौत हुई। इन सब के बीच ब्रिटिश हुकूमत ने द ग्रेट एक्सपेरिमेंट नाम से एक खास तरह की योजना को शुरू किया। इसमें भारतीय मजदूरों को कर्ज और काम करने का लालच देकर विदेश में भेज दिया जाता था। 

इसको इंडेंचर्ड लेबर सिस्टम कहा जाता है। इस व्यवस्था में अंग्रेज मजदूरों से एक कागज पर अंगूठा लगवा लेते थे और उन्हें तय वर्षों तक काम करने क लिए बाध्य कर दिया जाता था। गिरमिट शब्द अंग्रेजी के एग्रीमेंट शब्द से रूपांतरित होकर बना है। ऐतिहासिक साक्ष्यों में यह जिक्र मिलता है कि 10 सितंबर, 1834 को कोलकाता से एटलस नामक के जहाज पर 36 मजदूरों को मॉरीशस भेजा गया।

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यहीं से गिरमिटिया मजदूरों के इतिहास की शुरुआत मानी जाती है। 1834 से लेकर साल 1920 तक करीब 4.5 लाख भारतीय लोगों को मॉरिशस ले जाया गया। इन्हीं गरिमिटिया मजदूरों ने बाद में जाकर पूरी मॉरिशस की सियासय को बदलने का काम किया। साल 1930 में नवीनचंद्र रामगुलाम के पिता शिवसागर रामगुलाम ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत छेड़ दी।

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मॉरिशस में उन्होंने मजदूरों के अधिकारों को लेकर किए जाने वाले प्रदर्शनों का नेतृत्व किया। वहीं 12 मार्च, 1968 को मॉरिशस को आजादी मिली। इसके बाद शिवसागर वहां के राष्ट्रपिता कहलाए। मॉरिशस की आजादी के बाद भारत ने सबसे पहले इसे मान्यता दी, तब से लेकर आज तक दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग रहा है। 

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