तीनों देशों के बीच बांध को लेकर वार्ता इसी महीने शुरू हुई थी। विवाद का सबसे बड़ा विषय है कि सूखे की स्थिति में बांध कैसे काम करेगा और जो लंबित विवाद हैं उन्हें कैसे निपटाया जाएगा। समाचार एजेंसी एएफपी ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से कहा है कि मिस्र और सूडान की ओर से उठाए गए विरोध पर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद सोमवार को चर्चा कर सकती है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इथियोपिया को बांध में पानी भरने से रोकने के लिए मिस्र ने मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाने की कोशिश की है और परिषद सोमवार को इसे लेकर बैठक भी कर सकती है। इथियोपिया इस वार्ता में किसी भी बाहरी देश के दखल को लेकर चिंतित है।
फरवरी में अमेरिकी राजस्व विभाग की मध्यस्थता में हो रही वार्ता टूट गई थी। एबी सरकार ने अमेरिका पर मिस्र का पक्ष लेने के आरोप लगाए थे। अफ्रीकी यूनियन आयोग के चेयरमैन मूसा फाकी मोहम्मद ने तीनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच वार्ता के बाद एक बयान में कहा है कि 'तीनों नेता विवाद के निपटारे के लिए अफ्रीकी आयोग के नेतृत्व में वार्ता प्रक्रिया के लिए तैयार हो गए हैं।' वहीं प्रधानमंत्री एबी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 'अफ्रीका के मुद्दे का समाधान अफ्रीका में ही होना चाहिए।'
10 देशों से होकर गुजरती है नील नदी
शनिवार को जारी अपने बयान में अफ्रीकी यूनियन ने कहा है कि, 'इथियोपिया, मिस्र और सूडान के बीच 90 फीसदी विवादों का निपटारा हो चुका है।' यूनियन ने ये भी कहा है कि तीनों ही देश ऐसा कोई बयान न दें या ऐसा कोई कदम न उठाएं जिससे वार्ता प्रक्रिया को ठेस पहुंच सकती है।
आयोग ने कहा है कि एक समिति गठित की गई है जो एक सप्ताह के भीतर सिरिल रामाफोसा को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। अफ्रीका की सबसे बड़ी नदी नील दस देशों से होकर गुजरती है और ये इन देशों की जीवनरेखा है। पानी के अलावा ये बिजली का भी अहम स्रोत है। नील नदी पर बन रहे इथियोपिया के जीईआरडी बांध पर करीब 4 अरब डॉलर खर्च हुए हैं और ये 6450 मेगावॉट बिजली पैदा करेगा।