रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस और इंडियन डिफेंस रिव्यू में यह शोध पब्लिश हुआ है। शोध के मुताबिक, समुद्र की अथाह गहराइयों में रहने वाले एलिसिला जिंगेंटिया के बारे में वैज्ञानिकों की समझ पूरी तरह बदल गई है। एलियन समझा जाने वाला यह जीव विशालकाय क्रस्टेशियन समुद्र तल पर व्यापक रूप में है और अच्छे से पनप रहा है। शोध में मिली नई जानकारी से वैज्ञानिक भी हैरान हैं।
समुद्र की गहराई में रहता है जीव
शोधकर्ताओं को नए शोध में पता चला है कि एलिसिला जिगेंटिया 13.4 इंच तक बढ़ सकता है और कई महासागरों में 17,400 फीट से लेकर 29,300 फीट या इससे अधिक गहराई में रह रहा है। यह बेहद ठंडे तापमान और मुश्किल परिस्थितियों में भी जीवित रह सकता है। लंबी दूरी तय करके यह कई महासागरों में फैल चुका है।
आम भाषा में एलिसिला जिगेंटिया को 'एम्फीपोड' कहा जाता है। यह समुद्री जीव झींगे की तरह दिखता है। कई दशकों तक इस जीवन गहरे समुद्र की अजीबोगरीब प्रजाति माना जा रहा है। इस देखना संयोग माना जाता था। इसे अस्तित्व को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे, लेकिन इस इस अध्ययन से खुलासा हुआ है कि यह प्रजाति बिल्कुल दुर्लभ नहीं है, बल्कि काफी फैली हुई है।
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अजोबीगरीब दिखने वाला यह जीव कई दशकों तक गहरे समुद्र की अजीबोगरीब प्रजाति माना जाता रहा। इसे देखे जाने को संयोग माना जाता था। इसके अस्तित्व पर ही सवाल थे लेकिन इस अध्ययन से पता चला है कि यह प्रजाति बिल्कुल दुर्लभ नहीं है, बल्कि काफी फैली हुई है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के डॉक्टर पेज मारोनी ने दुनियाभर के गहरे समुद्र अभियानों के जरिए एलिसिला जिगेंटिया की स्थिति को समझने की कोशिश की। दुनिया में अलग-अलग हिस्सों से जमा किए गए नमूनों के आनुवंशिक अध्ययनों ने साबित किया है कि एलिसिला जिगेंटिया गहरे समुद्र तल के विशाल क्षेत्रों में पनप रहा है।
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इस खोज के सबसे दिलचस्प पहलुओं में से एक एलिसिला जिगेंटिया आबादी के बीच पाई जाने वाली आनुवंशिक एकरूपता है। विशाल और भौगोलिक रूप से दूर के गहरे समुद्र क्षेत्रों पर कब्जा करने के बावजूद इनमें बहुत कम आनुवंशिक भिन्नता है। एक्सपर्ट इसे उसके लचीलेपन का एक उल्लेखनीय उदाहरण कह रहे हैं।
कैसे रहता है जीवित?
गहरे समुद्र में भोजन बहुत दुर्लभ होता है और तापमान जमाने के करीब है। भारी दबाव भी जीवित रहने के लिए चुनौती है। फिर भी इस एम्फीपोड ने गहरे समुद्री खाइयों और हैडल जोन में पनपने का तरीका निकाल लिया है। स्कैवेंजर के तौर पर यह समुद्र तल पर गिरने वाले कैरियन और कार्बनिक पदार्थ पर भोजन करता है। इस जीव के पेट का अध्ययन किया गया, जिससे पता चला है कि यह कम भोजन उपलब्धता वाले वातावरण में भी जिंदा रह सकता है। यह कार्बनिक पदार्थ से गुजारा कर सकता है।