इस प्यारे और मासूम बच्चे का नाम टिनोटेंडा पुंडु। पुंडु ने अपनी छोटी सी जिंदगी में जिंदा रहने के कई कारगर तरीके जरूर सीख लिए थे। उत्तरी जिम्बाब्वे के एक गांव में टिनोटेंडा पुंडु रहता था। वह एक दिन अपने गांव से भटक कर घने जंगलों में पहुंचा गया। 27 दिसंबर से लापता 8 साल के मासूम बच्चे को न रास्ता मालूम और न कोई मदद करने वाला। पुंडु बीच जंगल में चला गया। सबसे बड़ी बात है कि यह कोई आम जंगल नहीं, बल्कि लॉयन सैंक्चुरी है, जिसका नाम माटुसाडोना नेशनल पार्क है।
बच्चे का गांव सूखा प्रभावित है। यहां पर पुंडु को पानी के लिए जमीन खोदने का तरीका बताया जाता था। इसके साथ ही तर जमीन की पहचान भी सिखाई जाती थी। जंगल में पहुंचने के बाद पुंडु को यह सीख काम आई। जंगल में उसने डंडे से नदी के किनारे को खोदना शुरू किया, जिससे जो पानी निकलता उससे वो अपनी प्यास बुझा लेता और जिंदा रहने लगा।
Airplanes Safest Seat: हवाई जहाज में कौन सी होती है सबसे सुरक्षित सीट? कहां बैठने पर हादसे में बच सकती है जान
टिनोटेंडा पुंडु के गावं वाले ढोल बजाकर उसकी तलाश कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि ढोल की आवाज सुनकर पुंडु आवाज की दिशा में आएगा और वह मिल जाएगा। हालांकि, गांव वालों की यह कोशिश फेल हो गई। दरअसल, आठ साल का पुंडु भटकर अपने गांव से 50 किलोमीटर दूर जंगल में चला गया था। गांव के लोग उसे आसपास ही खोज रहे थे। जब एक दो दिन बीत गया था, वो भूख से बेसुध होने लगा, तो उसने जंगली फल खाने शुरू किए। स्थानीय सांसद ने पुंडु की होशियारी के बारे में बताते हुए कहा कि वह इतना चतुर था कि ऊंचे चट्टानों पर सोता था ताकि शेर और अन्य वन्यजीव उस तक न पहुंच पाए।
Viral News: पानीपुरी वाले को मिला जीएसटी नोटिस, एक साल में यूपीआई से कमाए 40 लाख, लोग बोले- नौकरी बदल लेते हैं
पांच दिन बीत जाने के बाद टिनोटेंडा पुंडु ने रेंजर की कार की आवाज सुनी और उस तरफ दौड़कर गया, लेकिन उसके पहुंचने तक कार चली गई थी। अच्छी बात यह रही कि रेंजर बाद में वापस आए और उन्होंने बच्चे के आकार के पैरों के निशान देखे और जल्द ही उसे खोज लिए। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया और उसका इलाज किया गया।
Mahakumbh 2025: कौन हैं महाकुंभ मेले में चर्चा का विषय बने तीन फीट के छोटू बाबा, 32 साल से नहीं किया स्नान
बच्चे के लापता होने की सूचना के बाद रेंजर्स और पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी थी। स्थानीय सांसद मुरोम्बेदजी ने बताया ग्रामीणों ने भी तलाश में मदद की। उन्होंने कहा कि यह एक 'चमत्कार' था कि वह खतरनाक इलाके में इतने लंबे समय तक अकेला रहा। सोशल मीडिया पर टिनोटेंडा की कहानी शेयर की गई है, जिसमें एक व्यक्ति ने लिखा यह एक अविश्वसनीय रूप से भाग्यशाली लड़का है। जिम्बाब्वे की माटुसाडोना नेशनल पार्क में शेर, तेंदुए, हाथी और भैंस समेत कई जानवर रहते हैं।