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400 साल पुरानी है ये मौत की झील, रातों-रात ले ली थी 5 हजार लोगों और जानवरों की जान

Sat, 02 Feb 2019 03:07 PM IST
पंखुड़ी सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : atlasobscura
कहते हैं जब-जब प्रकृति के साथ दुर्व्यवहार हुआ है, तब-तब दुनिया को विनाश का सामना करना पड़ा है। फिर चाहे वो सुनामी हो, पुरे उत्तराखंड को बर्बाद कर देने वाली बाढ़ हो या फिर दुनिया में हुई बाकि की विनाशकारी घटनाएं। लेकिन इतिहास में एक विनाशकारी प्राकृतिक आपदा भी हुई है, जिसमें रातों-रात हजार से अधिक लोगों की मौत हो गयी थी। 
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- फोटो : flickr
21 अगस्त 1986 को अफ्रीका के कैमरून में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जिसमें रातों-रात हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। लोगों की मौत का दोषी वहां स्थित न्योस झील को माना जाता है। इस हादसे के बाद से इसे 'द बैड लेक' के नाम से भी जाना जाता है।
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- फोटो : atlasobscura
लोगों के अनुसार इस झील में बुरी आत्माएं प्रवास करती हैं, जो हमेशा किसी न किसी को अपना शिकार बनाने की तलाश में रहती हैं। हांलाकि, ये बात कितनी सच है इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन 1986 में जब इस झील ने 1746 लोगों को अपना शिकार बनाया, तब से न्योस झील को लेकर लोगों के मन में अजीब सा डर बैठ गया है।

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- फोटो : slate.com
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तबाही की वजह कुछ और है। दरअसल, न्योस झील ज्वालामुखी के क्रेटर पर बनी हुई है, जिस कारण इसमें कार्बन डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा पाई जाती है। वहीं गैस रिलीज होने के बजाए, वो झील में बढ़ती रही, जिस वजह से धीरे-धीरे झील का पानी बम का गोला बनता गया।
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- फोटो : atlasobscura
रिपोर्ट के अनुसार, झील के एक गैलन पानी में पांच गैलन कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद था और 21 अगस्त 1986 को झील के पानी में छोटा सा विस्फ़ोट हुआ, जिससे पानी 300 फ़ीट तक ऊपर आ गया।
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- फोटो : cnn
देखते ही देखते झील के अंदर जमा जानलेवा गैस हवा में फैल गई और 20 सेकेंड के अंदर इस गैस के कारण करीब 1746 जिंदा लोगों समेत, साढ़े तीन हजार जानवरों की मौत हो गई। हजारों लोगों की मौत के कारण झील नीले रंग से लाल रंग में परिवर्तित हो चुकी थी। 400 साल से भी ज़्यादा पुरानी इस झील को मौत की झील भी कहा जाता है।
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