चीन की एक ग्रीन इमारत
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आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के साथ ही चीन ने भवन निर्माण को भी रफ्तार दी है। इसी के साथ इन इमारतों में ऊर्जा का उपयोग भी बढ़ा, जिसने पर्यावरण के लिए चुनौती पैदा कर दी। वर्ष 2001 से 2016 के दरमियान चीन के निर्माण क्षेत्र में एक अरब टन कोयले के बराबर ऊर्जा की खपत हुई है। कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर भवन निर्माण तक जितनी ऊर्जा का इस्तेमाल हुआ, वो चीन के कुल कार्बन उत्सर्जन का लगभग पांचवा हिस्सा है। इतने व्यापक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन इंसान और पर्यावरण दोनों के लिए खतरे की घंटी है।
इस खतरे को चीन के लोगों ने महसूस भी किया है, और उसकी कीमत भी चुकाई है। इसीलिए अब इमारतें बनाने के ऐसे नए तरीकों पर काम किया जा रहा है जिससे कार्बन उत्सर्जन कम हो सके। इसके लिए अभी तक का सबसे कारगर तरीका इमारतों को पौधों से ढक देना है।