यह मामला 16 साल पहले का है। दरअसल, पांच जुलाई, 2003 को गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम की एक बस में अचानक निरीक्षण के दौरान एक यात्री बेटिकट पाया गया। इस बस के कंडक्टर चंद्रकांत पटेल थे। पूछताछ के दौरान यात्री ने निगम के अफसरों को बताया कि उसने टिकट के पैसे दे दिए हैं, लेकिन कंडक्टर ने उसे टिकट नहीं दिया।
इसके बाद गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम ने कंडक्टर चंद्रकांत पटेल के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी। इस जांच में चंद्रकांत दोषी पाए गए, जिसके बाद परिवहन निगम ने सजा के तौर पर चंद्रकांत पटेल के मौजूदा वेतन को दो स्टेज कम कर दिया। अब उन्हें अपने वेतन में 15 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।
परिवहन निगम के मुताबिक, अब चंद्रकांत पटेल को उनकी बाकी बची नौकरी उसी वेतनमान पर करनी पड़ेगी, जो निगम ने निर्धारित की है। निगम के अधिकारियों की मानें तो चंद्रकांत पहले भी कई यात्रियों के साथ ऐसा कर चुके थे, लेकिन उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था।