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वो गुमनाम मुल्क, जिसे सिर्फ पांच देशों से मिली है मान्यता, वीरान दिखते हैं कई इलाके

Tue, 31 Dec 2019 10:32 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अबखाजिया - फोटो : Social media
जब वक्त का पहिया घूमता है तो अपने साथ सारे जमाने को बदलता चलता है। फिर भी, कुछ लोग और कुछ जगहें ऐसी होती हैं, जो गुजरे हुए समय की कैद से आजाद नहीं हो पाती हैं। आज हम आप को ऐसे ही इलाके की सैर पर ले चलते हैं। इस जगह का नाम है अबखाजिया। आपने शायद ही इसका नाम सुना हो। और, जिन्होंने सुना होगा, वो यहां गए नहीं होंगे। ये इलाका पूर्वी यूरोप में काला सागर और काकेशस पर्वतों के बीच स्थित है। 

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अबखाजिया - फोटो : Social media
अबखाजिया ने 1990 के दशक में खुद को आजाद मुल्क घोषित कर दिया था, लेकिन इसे गिने-चुने देशों ने ही मान्यता दी है। तो, ये ऐसा देश है, जिसे दुनिया जानती-मानती नहीं। 1980 के दशक के आखिर में जब सोवियत संघ बिखरना शुरू हुआ, तो अबखाजिया भी जॉर्जिया से आजाद होने के लिए अंगड़ाई लेने लगा। जॉर्जिया, सोवियत संघ से स्वतंत्र होना चाहता था और अबखाजिया उसकी पाबंदी से। 
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अबखाजिया - फोटो : Social media
1930 के दशक से अबखाजिया, सोवियत संघ के गणराज्य जॉर्जिया का हिस्सा था, लेकिन इसे काफी खुदमुख्तारी (ऑटोनोमी) हासिल थी। 1931 से पहले अबखाजिया एक स्वतंत्र इलाका हुआ करता था। जब 1991 में जॉर्जिया ने सोवियत संघ से आजादी का एलान किया, तो अबखाजिया के बाशिंदों को लगा कि उनकी स्वायत्तता तो खत्म हो जाएगी। तनाव बढ़ा और 1992 में गृहयुद्ध छिड़ गया। शुरुआत में तो जॉर्जिया की सेना को बढ़त हासिल हुई और उसने अबखाजिया के बागियों को राजधानी सुखुमी से बाहर खदेड़ दिया। लेकिन, विद्रोहियों ने फिर से ताकत जुटाकर जॉर्जिया की सेना पर तगड़ा पलटवार किया। इस लड़ाई में दसियों हजार लोग मारे गए। जिसके बाद जॉर्जियाई मूल के दो लाख से ज्यादा लोगों को अबखाजिया छोड़कर भागना पड़ा। इस काम में रूस की सेना ने भी अबखाजिया के बागियों की मदद की थी।  

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अबखाजिया - फोटो : Social media
सोवियत संघ के जमाने में अबखाजिया सैलानियों के बीच बहुत मशहूर था। हल्का गर्म और हल्का सर्द मौसम, सैर-सपाटे के बहुत मुफीद माना जाता था, लेकिन 1990 के दशक में जब से गृह युद्ध छिड़ा, ये देश सैलानियों से वीरान हो गया। जॉर्जिया की सेनाएं यहां से पीछे हट गईं। आज यहां के होटल और रेस्टोरेंट वीरान पड़े हैं। 
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अबखाजिया - फोटो : Social media
मशहूर फोटोग्राफर स्टेफानो माज्नो ने वक्त के दायरे में कैद इस देश का कई बार दौरा किया और वहां की तस्वीरें खींचीं। स्टेफानो कहते हैं कि ये मुश्किल काम नहीं था। हालांकि अभी भी अबखाजिया की सीमाओं पर रूस की सेना का कब्जा है। तो ये नाम का स्वतंत्र देश है। हकीकत में तो अबखाजिया, रूस की कठपुतली है। 
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अबखाजिया - फोटो : Social media
2008 में जॉर्जिया से छोटी सी जंग के बाद से रूस की सेनाओं ने अबखाजिया को जॉर्जिया पर हमले के लिए इस्तेमाल करती हैं। अबखाजिया और रूस के रिश्ते बेहद करीबी हैं। वो रूस से मिलने वाली मदद पर ही निर्भर है। स्टेफानो कहते हैं कि रूस का कब्जा केवल अबखाजिया की सीमाओं पर नहीं है। रूस ने तो अबखाजिया की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था पर भी कब्जा कर रखा है। यहां के रियल स्टेट सेक्टर पर भी रूस का कंट्रोल होता जा रहा है। इससे अबखाजिया को ये फायदा है कि इसे रूस की मदद मिलती रहेगी। 
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अबखाजिया - फोटो : Social media
अबखाजिया का बुनियादी ढांचा रख-रखाव की कमी के चलते बिखर रहा है। इसे केवल पांच देशों, रूस, निकारागुआ, सीरिया, नाउरू और वेनेज़ुएला से मान्यता मिली है। स्टेफानो बताते हैं कि यहां टैक्सी किराए पर लेना बहुत बड़ी चुनौती है। सफर के लिए आप को सरकारी बसों के भरोसे ही रहना होगा। इन्हीं से अहसास होगा कि आप टाइम मशीन पर सवार होकर समय में पीछे चले गए हैं। 

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अबखाजिया - फोटो : Social media
मजे की बात ये है कि यहां के बस अड्डे भी सोवियत संघ के जमाने के हैं। 1990 के दशक से चली आ रही लड़ाई की वजह से यहां मलबों के ढेर लगे हैं। अबखाजिया की करेंसी रूस की रूबल है। देश की ज्यादातर संपत्तियों पर रूस का ही कब्जा है। अबखाजिया के पास अपनी संसद भी नहीं है। राजधानी सुखुमी में यहां की संसद की पुरानी इमारत वीरान पड़ी है। पास स्थित शहर का प्रमुख रेलवे स्टेशन भी वीरान है। स्टेफानो कहते हैं कि सरकारी इमारतों की तस्वीरें लेना यहां मुश्किल काम है, लेकिन लोगों की तस्वीरें लेने में कोई दिक्कत नहीं। हाल ये है कि यहां उन तस्वीरों को डेवेलप करने की तकनीक भी उपलब्ध नहीं है।  
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अबखाजिया - फोटो : Social media
एक वक्त ऐसा भी था कि हर साल करीब दो लाख लोग अबखाजिया की सैर के लिए आते थे। ये सैलानी दुनिया भर से आते थे, लेकिन अब यहां सिर्फ रूस के लोग घूमने-फिरने आते हैं। पड़ोसी देश जॉर्जिया में तो बाकायदा कानून है जिसके तहत अबखाजिया जाने की मनाही है। इस देश की आबादी का एक चौथाई हिस्सा जॉर्जियाई मूल के लोग हुआ करते थे। उनके भागने के बाद से अबखाजिया वीरान सा लगता है। 
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