कुत्तों को डांटने पर जब वे मासूम सा चेहरा बना लेते हैं तो हमे लगता है उन्हें अपनी गलती का अहसास है। लेकिन ऐसा होता नहीं क्योंकि विशेष कहते हैं कि कुत्तों को अफोसस नहीं होता। न्यू सॉर्क के बारनार्ड कॉलेज की एलेकजैंड्रा होरोविट्ज कहती हैं कि डांटने पर हर कुत्ते को देख कर लगता है कि उसे अफसोस है।
बल्कि जिन कुत्तों को उनकी गलती न होने पर भी डांटा गया उनमें और ज्यादा अफसोस दिखा। लेकिन ऐसा हम इंसानों को ही लगता है, होता नहीं।कुत्ते सूंघ कर इंसानों में कैंसर, मधुमेह जैसी बीमारियां जांच सकते हैं। वे समझ जाते हैं जब इंसान के शरीर में साधारण से हट कर कुछ अलग कंपाउंड बनने लगते हैं।
कुत्तों की पूंछ हिलाने का मतबल हर बार ये नहीं होता कि वे खुश हैं क्योंकि कई लोग ऐसा ही मानते हैं। पूंछ हिलाने के तरीके पर निर्भर करता है कि कुत्ते कैसा महसूस कर रहे हैं। दाईं तरफ हिलाने का मतलब वे खुश हैं जबकि बाईं तरफ का मतलब वे डरे हुए हैं। धीरे-धीरे हिलाते हैं तो मतलब वो संकोच कर रहे हैं और तेज तेज हिलाने का मतलब वे गुस्सा हैं।