अल सोगारा गांव
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अलशकीरी जनजाति की तरह क्षेत्र के अन्य लोगों में भी पशुओं का अर्थ समृद्धि से है। जिस व्यक्ति के पास जितनी ज्यादा बकरियां, भेड़ें और खच्चर हों, वह उतना ही सम्पन्न माना जाता है। मोहम्मद नासेर बताते हैं कि पशुपालन के साथ वे खेती भी करते हैं और अनार, खजूर, नाशपाती, आड़ू, अखरोट, संतरे, अंजीर, लहसुन, प्याज और अन्य सब्जियां उगाते हैं। ओमान और अरब क्षेत्र के अन्य देशों के लोगों की तरह ही अल सोगारा जनजाति भी आवभगत का एक परंपरागत तरीका अपनाती है, जिसमें गांव वाले घर आए मेहमानों को पूरे तीन दिन तक खिलाने-पिलाने के बाद ही घर में रूकने का कारण पूछते हैं।