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Egypt Temple: इस मुस्लिम देश में मिला 4500 साल पुराना सूर्य मंदिर, देख वैज्ञानिक भी हैरान, अब खुलेगा ये रहस्य

Sat, 20 Dec 2025 05:12 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Ancient Temple Discovered in Egypt: मिस्र में पुरातत्वविदों ने 4,500 साल पुराना सूर्य देव का मंदिर खोजा है। राजधानी काहिरा में यह खोज हुई है। इस मंदिर से मिस्र की प्राचीन सभ्यता की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज से मिस्र के प्राचीन इतिहास को जानने में मदद मिल सकती है। 
 
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इस मुस्लिम देश में मिला 4500 साल पुराना सूर्य मंदिर - फोटो : the Egyptian Ministry of Tourism and Antiquities
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विस्तार
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Ancient Temple in Egypt: पुरातत्व विभाग ने मिस्र की राजधानी काहिरा में एक खोज की है, जिसने दुनिया को हैरान कर दिया है। यहां पर एक सूर्य मंदिर खोजा गया है, जो करीब 4500 साल पुराना है। प्राचीन समय में इस मंदिर के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया गया, जहां पर पांचवें साम्राज्य के छठे राजा ने अपने मंदिर का निर्माण कराया। पुरातत्व विभाग ने कई वर्षों की खोज और कड़ी मेहनत के बाद ऐतिहासिक मंदिर के अवशेषों को सुरक्षित ढंग से खोजा है। यह मिस्र की प्राचीन सभ्यता की महत्वपूर्ण झलक दिखाता है। 

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मिस्र के पुरावशेष और पर्यटन मंत्रालय की तरफ से मंदिर की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर की गई हैं। मंत्रालय ने बताया इटली और पोलैंड के संयुक्त आर्कियोलॉजिकल मिशन के तहत यह खोज की गई है। यह मिशन King Nyuserre के मंदिर पर काम कर रहा था। 

वैज्ञानिकों ने मंदिर के नीचे कच्ची ईंटों से बनी एक भवन खोजा है। इसे देखने के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि यह सूर्य मंदिर पांचवें साम्राज्य (2465 से 2323 ईसा पूर्व) का हिस्सा हो सकता है। इस खोज से मिस्र के प्राचीन इतिहास को समझने में मदद मिल सकती है। 
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क्या-क्या खोज में मिला?

इटली और पोलैंड की संयुक्त खोज टीम ने मंदिर के अंदर से मिट्टी के बर्तन और बियर ग्लास भी खोजे हैं, जिससे प्राचीन मिस्र के जीवन और पूजा पद्धति को समझने में मदद मिल सकती है। 
मंदिर के अवशेषों में पांचवें साम्राज्य के राजाओं के नाम वाले कुछ टिकट खोजे गए हैं। पुरावशेष और पर्यटन मंत्रालय ने बताया कि मंदिर की इमारत के कुछ हिस्सों को बाद में पांचवें साम्राज्य के छठे फारोह ने ध्वस्त करवा दिया था। उन्होंने अपना मंदिर बनवाने के लिए ऐसा किया। 

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विज्ञान और खगोल ज्ञान का केंद्र भी था मंदिर 

वैज्ञानिकों ने मंदिर के अंदर पत्थरों पर उकेरा धार्मिक कैलेंडर खोजा है। इसमें सोकार, मिन और रा से जुड़े त्योहारों की जानकारी दी गई है। सबसे खास बात यह है कि मंदिर की छत का इस्तेमाल तारों और ग्रहों के अध्ययन के लिए होता था। इससे पता चलता है कि यह पूजा स्थल नहीं, बल्कि विज्ञान और खगोल ज्ञान का केंद्र भी था। 

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10,000 वर्ग फीट में फैला था मंदिर 

मंदिर करीब 10,000 वर्ग फीट में फैला था। इसकी भव्यता का अंदाजा सफेद चूना पत्थर की नक्काशी, ग्रेनाइट के स्तंभ, गलियारे और छत तक जाने वाली सीढ़ियों से  लगाया जा सकता है। इसमें एक ढलान भी खोजी गई, जो नील नदी या उसकी किसी शाखा से जुड़ी मानी जा रही है। संभावना है कि नावों से श्रद्धालु यहां आते थे।

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